अंबाला: धान की कटाई शुरू होते ही खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने इस बार निगरानी व्यवस्था को और हाईटेक कर दिया है। अब खेतों में आग लगने की सूचना पर केवल कर्मचारी ही मौके पर नहीं पहुंचेंगे, बल्कि सैटेलाइट और ड्रोन के जरिए भी खेतों की निगरानी की जाएगी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सैटेलाइट के माध्यम से पराली जलाने की आशंका वाली लोकेशन चिन्हित की जाएगी। इसके बाद कृषि विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर स्थिति की जांच करेंगी और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जाएगी। सरकार की ओर से कृषि विभाग को जल्द विशेष ड्रोन उपलब्ध कराने की भी तैयारी है।
2.10 लाख एकड़ में हुई धान की खेती
अंबाला जिले में इस सीजन करीब 2 लाख 10 हजार एकड़ क्षेत्र में धान की खेती की गई है। फसल कटाई के बाद बड़ी मात्रा में फसल अवशेष निकलने की संभावना है। ऐसे में पराली प्रबंधन और खेतों में आग की घटनाओं को रोकना विभाग के लिए बड़ी चुनौती है।
इसी को देखते हुए जिले के करीब 400 गांवों में विशेष निगरानी टीमें गठित की गई हैं। इन टीमों में करीब 600 कर्मचारी शामिल हैं। कर्मचारी खेतों की निगरानी के साथ किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक भी कर रहे हैं।
150 गांवों में लगाए जा चुके जागरूकता कैंप
कृषि विभाग की ओर से गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अब तक करीब 150 गांवों में जागरूकता कैंप आयोजित किए जा चुके हैं।
इन कैंपों में किसानों को बताया जा रहा है कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो सकती है और इससे वायु प्रदूषण भी बढ़ता है। विभाग किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के विकल्पों के बारे में भी जानकारी दे रहा है।
इसके अलावा जिले के 25 स्कूलों में पेंटिंग प्रतियोगिताएं आयोजित की गई हैं, ताकि बच्चों को फसल अवशेष प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा सके।
पराली प्रबंधन पर 1200 रुपये प्रति एकड़ अनुदान
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पराली प्रबंधन करने वाले किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिया जाता है। वहीं कृषि यंत्र खरीदने पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान बताया गया है।
विभाग का उद्देश्य किसानों को पराली जलाने के बजाय उपलब्ध प्रबंधन विकल्पों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
पराली जलाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
कृषि विभाग ने साफ किया है कि जागरूकता अभियान के बावजूद यदि कोई किसान पराली जलाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विभाग के मुताबिक, संबंधित किसान की रेड एंट्री की जा सकती है, जिसके बाद दो साल तक मंडी में फसल की बिक्री प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा पुलिस के माध्यम से मामला दर्ज कराने और जमीन के रकबे के आधार पर 30 हजार रुपये तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाए जाने का प्रावधान भी बताया गया है।
कृषि विभाग का कहना है कि इस बार सैटेलाइट, ड्रोन और गांव स्तर की टीमों के जरिए निगरानी बढ़ाकर पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण का प्रयास किया जा रहा है।
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