वाशिंगटन, डीसी | 30 मई 2025 : राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए विवादास्पद टैरिफ को पलटने वाले अदालत के फैसले ने अमेरिका की व्यापार नीति में नई हलचल पैदा कर दी है। व्हाइट हाउस ने घोषणा की है कि वह इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा, जिससे वैश्विक व्यापार जगत में अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरिन लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “हम न्यायालय में यह लड़ाई जीतेंगे। यह निर्णय न्यायिक अतिक्रमण का उदाहरण है और हम इसे सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।” उन्होंने न्यायिक व्यवस्था के कुछ हिस्सों को “दुष्ट न्यायाधीश” कहकर आलोचना की, जिससे देश में राजनीतिक-न्यायिक तनाव और बढ़ गया है।
इस घटनाक्रम के बीच, ट्रम्प और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के बीच टैरिफ मुद्दों पर फ़ोन पर बातचीत हुई। वहीं, अमेरिका के वाणिज्य और व्यापार अधिकारियों ने दुनिया भर के समकक्षों के साथ संपर्क बनाए रखा है ताकि यह संकेत दिया जा सके कि अमेरिका अब भी व्यापार वार्ता के लिए तैयार है।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर प्रभाव
इन घटनाओं के बीच 5-6 जून को भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर नई वार्ता होने जा रही है। यह बातचीत दो प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत कर सकती है, लेकिन ट्रम्प प्रशासन की सख्त और “धमकाने वाली” नीति इस प्रक्रिया के लिए बाधा बन सकती है।
पूर्व अमेरिकी वाणिज्य सचिव रे विकरी ने भी चेताया कि अमेरिका का कठोर रुख व्यापार समझौते की राह में बाधा बन सकता है। उन्होंने कहा, “ट्रम्प प्रशासन व्यापार घाटे को लेकर गलतफहमी में है। घाटा हमेशा बाहरी कारणों से नहीं होता, यह अमेरिका की अपनी नीतियों और खर्च की आदतों से भी जुड़ा है।”
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
टैरिफ विवाद और न्यायिक फैसले ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अमेरिका पर केंद्रित कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक जाता है, तो इसका असर न केवल अमेरिकी व्यापार नीति पर, बल्कि वैश्विक बाजारों और बहुपक्षीय व्यापार समझौतों पर भी पड़ेगा।
ट्रम्प प्रशासन की ओर से दायर आपातकालीन अपील के बाद अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के रुख पर है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या न्यायपालिका व्हाइट हाउस की दलीलों को स्वीकार करती है या फिर टैरिफ को अवैध करार देने वाले निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा जाएगा।
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