Thursday , 1 October 2026
हरियाणा की कर-राजस्व व्यवस्था मजबूत करने पर जोर,
हरियाणा की कर-राजस्व व्यवस्था मजबूत करने पर जोर,

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने ‘हरियाणा की अपनी कर-राजस्व व्यवस्था’ के विश्लेषण व मजबूती के लिए आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया!

चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश की अपनी कर-राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करों की दर बढ़ाने के बजाय कर आधार का विस्तार, बेहतर अनुपालन, राजस्व हानि पर रोक और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य ईमानदार करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना राज्य की वित्तीय क्षमता को बढ़ाना है।

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मुख्यमंत्री बुधवार को विकसित हरियाणा 2047 के लिए ‘हरियाणा की अपनी कर-राजस्व व्यवस्था’ के विश्लेषण और मजबूती को लेकर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन का आयोजन स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट (SJHIFM) की ओर से किया गया।

कार्यक्रम में भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण गुप्ता, आबकारी एवं कराधान विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़ समेत नीति-निर्माता, कर प्रशासक, अर्थशास्त्री और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहे।

SGST संग्रह में 29 फीसदी की बढ़ोतरी

मुख्यमंत्री ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अगस्त तक हरियाणा का SGST संग्रह 29 फीसदी बढ़कर 24,662 करोड़ रुपये हो गया है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 19,174 करोड़ रुपये था।

उन्होंने बताया कि अगस्त 2026 में भी प्रदेश के SGST संग्रह में 21 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह वृद्धि 13 फीसदी रही।

मुख्यमंत्री के अनुसार, देश के कुल GST करदाताओं में हरियाणा की हिस्सेदारी 4 फीसदी से कम है, लेकिन देश के कुल GST संग्रह में प्रदेश का योगदान करीब 7.7 फीसदी है।

2030 तक कर राजस्व को 10 फीसदी और 2047 तक 15 फीसदी करने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा का अपना कर-राजस्व फिलहाल राज्य की GSDP के 7 फीसदी से कम है। सरकार ने इसे 2030 तक 10 फीसदी और 2047 तक 15 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लक्ष्य करों की दर बढ़ाकर हासिल नहीं किया जाएगा। इसके लिए कर आधार बढ़ाने, राजस्व व्यवस्था की दक्षता बढ़ाने, अनुपालन बेहतर करने और राजस्व की संभावित हानि को रोकने पर जोर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का फोकस ‘दर नहीं, आधार बढ़ाना और बोझ नहीं, अनुपालन बढ़ाना’ है।

आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से बढ़ेगा राजस्व आधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से उद्योग और सेवा क्षेत्र आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ा है। गुरुग्राम में IT, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर का विस्तार हो रहा है।

इसके अलावा गन्नौर में इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टिकल्चर मार्केट, IMT खरखौदा में वाहन निर्माण निवेश तथा रेवाड़ी, हिसार समेत अन्य क्षेत्रों में औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है।

उन्होंने पानीपत के टेक्सटाइल उद्योग, अंबाला के वैज्ञानिक उपकरण उद्योग, हिसार के स्टील उद्योग, यमुनानगर के प्लाईवुड उद्योग और रोहतक के नट-बोल्ट व ऑटो-कंपोनेंट उद्योग को भी राज्य की आर्थिक ताकत का महत्वपूर्ण आधार बताया।

30 नवंबर तक बढ़ाई गई वन टाइम सेटलमेंट स्कीम की अवधि

मुख्यमंत्री ने बताया कि पुराने लंबित कर विवादों के समाधान के लिए ‘हरियाणा एकबारगी व्यवस्थापन स्कीम, 2026’ लागू की गई है। इसका उद्देश्य पुराने मामलों का निपटारा करना और अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करना है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 की योजना का लाभ करीब 1 लाख 15 हजार व्यापारियों ने उठाया था। व्यापारियों की सुविधा को देखते हुए इस वर्ष की योजना की अवधि बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी गई है।

इसके साथ ही ‘पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0’ और ‘ऑटो म्यूटेशन सिस्टम’ के जरिए पंजीकरण और इंतकाल की प्रक्रियाओं को डिजिटल और समयबद्ध बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

AI और डेटा एनालिसिस से आधुनिक होगा टैक्स सिस्टम

मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की राजस्व व्यवस्था डेटा आधारित और आधुनिक तकनीक से सक्षम होनी चाहिए। GST, पंजीकरण, परिवहन, बिजली, शहरी विकास और अन्य सरकारी प्रणालियों के आंकड़ों को जोड़कर आर्थिक गतिविधियों की व्यापक तस्वीर तैयार की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि AI, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिसिस और इंटीग्रेटेड डेटाबेस की मदद से राजस्व की संभावनाओं की पहचान, जोखिम का आकलन और राजस्व हानि रोकने में मदद मिल सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक का उद्देश्य केवल निगरानी नहीं होना चाहिए, बल्कि ईमानदार करदाताओं को बेहतर और आसान सेवाएं उपलब्ध कराना भी होना चाहिए।

करदाता को केंद्र में रखकर बनेगी कार्ययोजना

मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों से अगले एक-दो वर्षों के तत्काल उपायों, मध्यम अवधि के सुधारों, तकनीक और डेटा सिस्टम तथा जरूरी संस्थागत बदलावों को लेकर स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि पूरी व्यवस्था के केंद्र में करदाता होना चाहिए। विभागों के बीच बेहतर तालमेल हो, नागरिकों का समय बचे और उन्हें प्रक्रियाओं को लेकर कम परेशानी हो।

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने हरियाणा की आर्थिक क्षमता का किया उल्लेख

भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने हरियाणा की आर्थिक क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के पास मजबूत औद्योगिक आधार, उद्यमशीलता और आर्थिक गतिविधियों के चलते विकास की पर्याप्त संभावनाएं हैं।

उन्होंने छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ नियमों को सरल बनाने और अनुपालन का बोझ कम करने पर जोर दिया।

उन्होंने बताया कि हरियाणा के अपने कर राजस्व में करीब आधा हिस्सा राज्य GST से आता है। उन्होंने संपत्ति कर आधार को मजबूत करने के लिए संपत्तियों के वार्षिक मूल्यांकन, आपस में जुड़े रिकॉर्ड और कर रियायतों की पारदर्शी जानकारी जैसे उपायों पर भी जोर दिया।

विशेषज्ञों के सुझावों से तैयार होगी आगे की रणनीति

SJHIFM के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य विकसित भारत और विकसित हरियाणा के लक्ष्य के लिए राज्य की राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेषज्ञों के सुझाव लेना है।

उन्होंने कहा कि सम्मेलन में सामने आने वाले सुझावों और विशेषज्ञ मार्गदर्शन को नीतिगत स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह सम्मेलन केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हरियाणा की कर-राजस्व व्यवस्था को मजबूत, आधुनिक, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए ठोस कदमों का आधार बनेगा।

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