भिवानी: जापान में चल रहे एशियन गेम्स 2026 में भिवानी के गांव धनाना की बेटी और मुक्केबाज प्रिया घणघस ने देश के लिए कांस्य पदक जीतकर अपनी शानदार उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ दिया है। महिला 60 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में प्रिया का मुकाबला चीन की यांग चंग्यू से हुआ, जिसमें उन्हें 1-4 से हार का सामना करना पड़ा। सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ प्रिया का पदक पहले ही पक्का हो चुका था।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!प्रिया के मुकाबले को उनके परिवार और परिचितों ने घर पर बैठकर टीवी पर देखा। बेटी के पदक जीतने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है।
गोल्ड से चूकीं, लेकिन देश को दिलाया कांस्य
प्रिया घणघस ने 60 किलोग्राम भारवर्ग में शुरुआती मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया। सेमीफाइनल तक पहुंचने के बाद उनके पास पदक का रंग बदलने का मौका था, लेकिन चीन की बॉक्सर के खिलाफ मुकाबला 1-4 से हारने के बाद उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।
परिवार का कहना है कि गोल्ड से चूकने का थोड़ा मलाल जरूर है, लेकिन देश के लिए कांस्य पदक जीतना भी बड़ी उपलब्धि है।
पिता बोले- घर लौटने पर होगा जोरदार स्वागत
प्रिया के पिता महेंद्र सिंह ने बेटी के प्रदर्शन पर खुशी जताते हुए कहा कि वह गोल्ड से जरूर चूक गईं, लेकिन देश के लिए मेडल जीतकर लौटी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रिया आने वाले मुकाबलों में और बेहतर प्रदर्शन करेंगी।
परिवार के मुताबिक, घर लौटने पर प्रिया का जोरदार स्वागत किया जाएगा। पिता ने यह भी बताया कि अब उनकी बेटी का लक्ष्य आगे की प्रतियोगिताओं की तैयारी करना है।
मां बोलीं- बेटी के लिए बनाएंगी खीर-चूरमा
प्रिया की मां ने कहा कि उन्हें बेटी से गोल्ड मेडल की उम्मीद थी, लेकिन कांस्य पदक मिलने पर भी वह बेहद खुश हैं। उन्होंने बताया कि प्रिया को देशी खाना पसंद है और घर लौटने पर बेटी के लिए खीर-चूरमा बनाया जाएगा।
मुकाबले के दौरान परिवार की नजरें लगातार टीवी स्क्रीन पर टिकी रहीं। बेटी के हर पंच के साथ परिवार उसका हौसला बढ़ाता रहा।
2016 में शुरू किया था बॉक्सिंग का सफर
गांव धनाना की रहने वाली प्रिया घणघस ने 2016 में बॉक्सिंग शुरू की थी। शुरुआत में उन्होंने दादरी में अभ्यास किया और बाद में 2022 से भिवानी में प्रशिक्षण लेना शुरू किया।
प्रिया को शुरुआत में कुश्ती पसंद थी, लेकिन भिवानी में कुश्ती की एकेडमी नहीं होने के कारण उन्होंने बॉक्सिंग को अपना खेल चुना। खेल के साथ उन्होंने पढ़ाई भी जारी रखी और 12वीं कक्षा में 83 प्रतिशत अंक हासिल किए।
कॉमनवेल्थ गेम्स में जीत चुकी हैं गोल्ड
प्रिया घणघस के लिए 2026 साल बेहद खास रहा है। इससे पहले अगस्त में ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में उन्होंने महिला 60 किलोग्राम बॉक्सिंग वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने फाइनल में कनाडा की मैरी अल-अहमादीह को हराकर गोल्ड अपने नाम किया था।
अब एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने के बाद प्रिया की नजर आगे की बड़ी प्रतियोगिताओं पर है। भिवानी और गांव धनाना के लोगों को उनकी अगली उपलब्धियों का इंतजार है।
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