गाजा, अगस्त 2025: गाजा शहर में एक इज़राइली हवाई हमले में अल जज़ीरा अरबी के वरिष्ठ पत्रकार अनस अल-शरीफ की मौत ने पत्रकारों की सुरक्षा और संघर्षग्रस्त इलाकों में मीडिया की भूमिका पर एक बार फिर से गहरा सवाल खड़ा कर दिया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!अनस अल-शरीफ, जो 28 वर्ष के थे, गाजा के अल-अक्सा विश्वविद्यालय से मीडिया में स्नातक थे और फिलिस्तीन के सर्वश्रेष्ठ युवा पत्रकार के रूप में सम्मानित भी हो चुके थे। उन्होंने अल जज़ीरा अरबी के लिए उत्तरी पट्टी से रिपोर्टिंग करते हुए गाजा की जमीनी हकीकत को विश्व के सामने लाने का साहस दिखाया।
अंतिम पोस्ट में दर्ज थी भयावह स्थिति
हमले के कुछ ही मिनट पहले, अनस अल-शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें उन्होंने लिखा था:
“लगातार बमबारी। दो घंटे से, गाजा शहर पर इज़राइली आक्रमण तेज़ हो गया है।”
उसी वीडियो को साझा करने के कुछ ही देर बाद वे एक तंबू पर हुए हवाई हमले में मारे गए। यह तंबू गाजा शहर के अल-शिफा अस्पताल के मुख्य द्वार के बाहर पत्रकारों के लिए बनाया गया था।
इज़राइली सेना के आरोप और अल जज़ीरा का खंडन
इज़राइली सेना ने एक बयान में अनस अल-शरीफ पर हमास के सशस्त्र गुट के नेता होने और रॉकेट हमलों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। सेना के अनुसार, वे हमास के एक आतंकवादी समूह के प्रमुख थे।
हालांकि, अल जज़ीरा मीडिया नेटवर्क ने इन आरोपों का सख्त खंडन किया और इसे पत्रकारों के खिलाफ “उकसाने वाला अभियान” बताया। नेटवर्क ने कहा कि ये आरोप पत्रकारों को निशाना बनाने और स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने की कोशिश हैं।
पत्रकार सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
पत्रकारों की सुरक्षा समिति (CPJ) ने इस हमले पर चिंता व्यक्त की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अनस अल-शरीफ की सुरक्षा का आह्वान किया था। CPJ की क्षेत्रीय निदेशक सारा कुदाह ने कहा,
“यह पहली बार नहीं है जब अनस अल-शरीफ को इज़राइली सेना ने निशाना बनाया है, लेकिन अब उनकी जान को गंभीर खतरा है।”
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