चंडीगढ़ | 14 जुलाई 2025 : हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर पर्यावरणीय मुद्दों ने जोर पकड़ लिया है। सिरसा से सांसद और कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री कुमारी सैलजा ने घग्घर नदी को लेकर सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि सरकारी लापरवाही ने घग्घर नदी को ‘मौत का दरिया’ बना दिया है, और इसके कारण हरियाणा का दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र ‘कैंसर बेल्ट’ में तब्दील हो रहा है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!46 फैक्ट्रियाँ बहा रहीं ज़हर, सरकार मौन
सैलजा का आरोप है कि पंजाब और हरियाणा में नदी के किनारे चल रहे 46 से अधिक कारखाने सीधे नदी में जहरीला वेस्टेज बहा रहे हैं। बिना ट्रीटमेंट प्लांट्स के शहरी सीवरेज और कीटनाशकों से भरे खेतों का पानी भी इसी नदी में मिल रहा है।
“सरकार को सब पता है, लेकिन कार्रवाई शून्य है। न प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जागता है, न ही स्वास्थ्य विभाग। सिरसा, फतेहाबाद, हनुमानगढ़ जैसे जिले इस जहर का खामियाजा भुगत रहे हैं,” सैलजा ने कहा।
टीडीएस 1068 एमजी/लीटर, कैंसर के 1678 नए केस
घग्गर नदी के पानी में TDS (Total Dissolved Solids) का स्तर 1068 mg/L तक पहुंच गया है, जो न केवल पीने लायक नहीं बल्कि खेती के लिए भी खतरनाक है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में हरियाणा में कैंसर के 1678 नए मामले सामने आए हैं – जिनमें से अधिकतर मामले घग्गर से प्रभावित इलाकों से हैं।
बच्चों की सेहत पर संकट, गांव खाली करने पर मजबूर लोग
सिरसा के रानियां और ऐलनाबाद क्षेत्रों में स्थिति और भी भयावह है। 13 गांवों में भूमिगत जल पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है, जहां कैंसर और त्वचा रोग तेजी से फैल रहे हैं। कुछ परिवार तो इलाके से पलायन भी कर चुके हैं।
घोषणाएं नहीं, जमीन पर काम चाहिए” – सैलजा
कुमारी सैलजा ने तीखे शब्दों में कहा, “यह सिर्फ एक पर्यावरणीय संकट नहीं है, यह मानव जीवन से खिलवाड़ है। अब लोग पानी के ऊपर से नहीं, पानी उनके ऊपर से गुजर रहा है। अगर सरकार नहीं चेती, तो जनता अब चुप नहीं बैठेगी।”
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