नई दिल्ली | 28 जून 2025 — दशकों से अटका सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर विवाद एक बार फिर राष्ट्रीय फोकस में आ गया है। केंद्र सरकार ने इस गंभीर जल विवाद को सुलझाने के लिए हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों को 10 जुलाई के आसपास दिल्ली में बैठक के लिए आमंत्रित किया है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय ने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भेजकर यह कदम उठाया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई है जब सुप्रीम कोर्ट ने 6 मई को केंद्र को निर्देश दिया था कि वह हरियाणा और पंजाब के बीच एसवाईएल नहर विवाद को प्राथमिकता से सुलझाए। मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को होनी है, जिससे पहले यह बैठक निर्णायक मानी जा रही है।
क्या है एसवाईएल विवाद?
एसवाईएल नहर परियोजना की कुल लंबाई 214 किलोमीटर है, जिसमें से 122 किलोमीटर हिस्सा पंजाब में और 92 किलोमीटर हरियाणा में आता है। हरियाणा ने अपना काम पूरा कर लिया है, लेकिन पंजाब में अब तक नहर अधूरी है। इस कारण हरियाणा को अपने हिस्से का पानी नहीं मिल पा रहा, जिससे राज्य के किसान और सिंचाई क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।
केंद्र की पहल, दिल्ली में बैठक का नया फॉर्मेट
इससे पहले तीन बार चंडीगढ़ में बैठकों की कोशिश हो चुकी है, जो बेनतीजा रहीं। अब नई जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कमान संभालते हुए यह बैठक दिल्ली में बुलाने का फैसला किया है। यह बदला हुआ स्थान और नई नेतृत्व शैली विवाद को सुलझाने की एक नई उम्मीद जगा रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और रणनीति
हरियाणा सरकार की ओर से अब तक बैठक पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सिंचाई विभाग का कहना है कि उन्हें अभी तक कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है। वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले ही कई बार यह कह चुके हैं कि पंजाब के पास “अतिरिक्त पानी नहीं है”।
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