चंडीगढ़, 24 जुलाई: हरियाणा सरकार ने सरकारी भूमि के मूल्यांकन को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार ने वर्ष 2021 की अधिसूचित नीति के तहत पैनलबद्ध (Empanelled) मूल्यांकनकर्ताओं के लिए एक व्यापक और सख्त आचार संहिता (Code of Conduct) को मंजूरी दे दी है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि नई आचार संहिता का उद्देश्य सरकारी भूमि के मूल्यांकन में निष्पक्षता, पेशेवर मानकों और जवाबदेही को सुनिश्चित करना है। यदि कोई मूल्यांकनकर्ता निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
नई व्यवस्था के अनुसार, आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले मूल्यांकनकर्ताओं को उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर पैनल से हटाया जा सकता है। इसके अलावा उनकी मूल्यांकन फीस जब्त की जा सकती है और उन पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
कई कानूनों का पालन करना होगा अनिवार्य
सरकार द्वारा तैयार की गई इस नीति के तहत प्रत्येक पैनलबद्ध मूल्यांकनकर्ता को हरियाणा भू-राजस्व अधिनियम, 1887, भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013, रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 तथा कंपनी (पंजीकृत मूल्यांकनकर्ता एवं मूल्यांकन) नियम, 2017 सहित सभी संबंधित केंद्रीय और राज्य कानूनों, नियमों एवं सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
हितों के टकराव की घोषणा होगी जरूरी
नई आचार संहिता का एक अहम प्रावधान यह भी है कि किसी भी भूमि मूल्यांकन कार्य की शुरुआत से पहले संबंधित मूल्यांकनकर्ता को ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) की घोषणा जमा करनी होगी। साथ ही, जहां लागू हो वहां आयकर विभाग, भारतीय स्टेट बैंक और सरकारी बीमा कंपनियों जैसी मूल संस्थाओं के दिशा-निर्देशों का पालन भी अनिवार्य रहेगा।
हर दो साल में होगी समीक्षा
डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि बदलती कानूनी और पेशेवर आवश्यकताओं के अनुरूप इस आचार संहिता की हर दो वर्ष में समीक्षा की जाएगी, ताकि भूमि मूल्यांकन प्रणाली को समय के साथ और अधिक प्रभावी एवं विश्वसनीय बनाया जा सके।
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