नई दिल्ली (26 मार्च): केंद्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान वाहन कबाड़ नीति (Vehicle Scrapping Policy) को लेकर अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस नीति के लागू होने से वाहन कलपुर्जों की कीमतों में 30 प्रतिशत तक की कमी आने की संभावना है, जिससे वाहनों की कीमतों में भी गिरावट आएगी। यह खबर उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है, जो अब सस्ती कारें खरीदने का सपना देख सकते हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!क्या है वाहन कबाड़ नीति? केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वाहन कबाड़ नीति का मुख्य उद्देश्य पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सड़क से हटाना है। इस नीति के तहत सरकार पुराने और अवैध वाहनों को हटाने के लिए प्रोत्साहन देती है। यह कदम पर्यावरण को बचाने, प्रदूषण को कम करने, और ऊर्जा की खपत घटाने के लिए उठाया गया है। नीति के तहत, वाहन मालिक अपने पुराने वाहनों को कबाड़ के रूप में लौटाकर नई कार खरीदने पर छूट और अन्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
नितिन गडकरी ने कहा कि इस नीति का लाभ सिर्फ पर्यावरण को नहीं मिलेगा, बल्कि नई तकनीक से बने वाहनों को बढ़ावा मिलेगा और साथ ही वाहनों के कलपुर्जों की कीमतों में 30 प्रतिशत की कमी आएगी। इसका सीधा असर वाहन की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे उपभोक्ता सस्ती और पर्यावरण अनुकूल कारें खरीद सकेंगे।
लिथियम-आयन बैटरियों की सस्ती कीमतें और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग गडकरी ने इस अवसर पर यह भी बताया कि सरकार की कोशिशों से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाया जा रहा है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि कच्चे माल की कीमतों में कमी आने से इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता में भी तेजी आएगी।
मंत्री ने यह भी कहा कि भारत में लिथियम-आयन बैटरियों की कीमतों में गिरावट आई है। अडानी और टाटा जैसी प्रमुख कंपनियां अब भारत में बड़े पैमाने पर लिथियम-आयन बैटरियों का उत्पादन करने जा रही हैं, जिससे इन बैटरियों की कीमतें और भी कम हो सकती हैं।
जम्मू-कश्मीर में लिथियम भंडार का खुलासा नितिन गडकरी ने जम्मू-कश्मीर में हाल ही में खोजे गए लिथियम भंडार का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह भंडार दुनिया के कुल लिथियम भंडार का लगभग 6 प्रतिशत है, जो भारत को लिथियम-आयन बैटरियों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएगा और कई लाख बैटरियों के निर्माण के लिए पर्याप्त होगा।
भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का विकास गडकरी ने भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की वृद्धि की भी सराहना की और कहा कि यह उद्योग अब अच्छी गति से बढ़ रहा है। भारत ने अब जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल उद्योग बन चुका है।
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