चंडीगढ़ | 16 जुलाई 2025 – भारत के राज्य-चिह्न का गैरकानूनी इस्तेमाल अब लोगों को भारी पड़ सकता है। हरियाणा सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रतीक चिह्न का अनधिकृत उपयोग, चाहे वह निजी वाहनों पर हो, लेटरहेड्स या साइनबोर्ड पर, कानून का गंभीर उल्लंघन है और इसके लिए कड़ी सज़ा दी जाएगी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!यह चेतावनी हरियाणा की गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने मंगलवार को दी। उन्होंने कहा कि भारत का राज्य-चिह्न केवल अधिकृत सरकारी अधिकारियों, विभागों और संवैधानिक पदाधिकारियों के लिए आरक्षित है।
क्या है मामला?
डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि कई लोग राज्य-चिह्न का उपयोग निजी पहचान, सामाजिक रुतबा या प्रभाव दिखाने के लिए कर रहे हैं, जो पूरी तरह से अवैध है। यह चिह्न भारत सरकार की आधिकारिक मुहर है, जिसका उपयोग “राज्य प्रतीक चिह्न (अनुचित प्रयोग निषेध) अधिनियम, 2005” और “प्रयोग विनियमन नियम, 2007” के तहत सख्ती से नियंत्रित है।
इन कानूनों के तहत किसी भी व्यक्ति या संगठन को, जो सरकार द्वारा अधिकृत नहीं है, इस चिह्न के प्रयोग की अनुमति नहीं है।
क्या होगी सज़ा?
“राज्य-चिह्न के अनधिकृत उपयोग पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्यवाही का प्रावधान है,”
– डॉ. सुमिता मिश्रा
सरकार अब इस दिशा में और भी कड़े कदम उठाने जा रही है, जिसमें शामिल होंगे:
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उच्च जुर्माना
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त्वरित अभियोजन प्रक्रिया
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निरीक्षण अभियान
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वाहनों की विशेष निगरानी
क्या होगा सरकार का अगला कदम?
डॉ. मिश्रा ने कहा कि इस गंभीर विषय पर राज्य स्तर पर एक व्यापक रणनीति बनाई गई है, जिसके तहत:
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स्कूल, कॉलेज, लॉ कॉलेज में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे
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यातायात पुलिस को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा
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जनता को कानूनी जानकारी देने के लिए मीडिया का सहारा लिया जाएगा
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शिकायत निवारण हेल्पलाइन और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया जा रहा है
डॉ. मिश्रा का सख्त संदेश
“राज्य-चिह्न राष्ट्र की संवैधानिक गरिमा का प्रतीक है। इसका निजी उपयोग न केवल गैरकानूनी है, बल्कि उन मूल्यों का भी अपमान है जिनका यह प्रतीक प्रतिनिधित्व करता है।”
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे इस चिह्न का उपयोग केवल वैध और अनुमत सीमाओं के भीतर करें, और इसकी पवित्रता और गरिमा की रक्षा में सहयोग करें।
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