नई दिल्ली / वॉशिंगटन, 15 मई 2025 : भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया संघर्षविराम को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर विवादों में हैं। सीजफायर का श्रेय खुद को देने के बाद अब उन्होंने अपने ही बयान से पलटी मार ली है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!ट्रंप ने गुरुवार को एक टेलीविज़न कार्यक्रम में कहा:
“मैं ये नहीं कह रहा कि मैंने जंग रुकवाई या मध्यस्थता की, मैंने सिर्फ मदद की थी उस स्थिति को शांत करने में, जो काफी खतरनाक हो चुकी थी।”
ट्रंप का यू-टर्न: क्या कहा, क्या नहीं?
पिछले सप्ताह ट्रंप ने दावा किया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच 10 मई को घोषित युद्धविराम में उनकी “मध्यस्थता” की अहम भूमिका रही। उन्होंने यहां तक कहा था कि अगर दोनों देश सीजफायर पर सहमत नहीं होते तो अमेरिका उनके साथ व्यापार नहीं करता।
लेकिन अब ट्रंप कह रहे हैं कि उनका योगदान केवल “मदद तक सीमित” था, न कि सीधा हस्तक्षेप या मध्यस्थता।
भारत ने ट्रंप के दावे को सिरे से खारिज किया
भारत सरकार ने पहले ही ट्रंप के इन बयानों को “अवास्तविक और भ्रामक” बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ तौर पर कहा था कि:
“भारत और अमेरिका के बीच 7 से 10 मई के बीच चल रही सैन्य स्थिति पर बातचीत हुई थी, लेकिन कभी भी व्यापार या किसी प्रकार की शर्तों पर चर्चा नहीं हुई।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि संघर्षविराम की पहल पाकिस्तान के DGMO की ओर से आई थी, जिन्होंने भारतीय सेना से संपर्क कर गोलीबारी रोकने की अपील की थी।
ट्रंप के विरोधाभासी दावे
डोनाल्ड ट्रंप पहले भी भारत-पाकिस्तान संबंधों में मध्यस्थता का दावा कर चुके हैं। चाहे वह 2019 में कश्मीर को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के नाम का उल्लेख हो या अब सीजफायर के मामले में ट्रेड-शर्तों की कहानी – हर बार उनके दावे भारत द्वारा खंडित किए गए हैं।
इस बार भी उन्होंने कहा था:
“अगर भारत और पाकिस्तान युद्धविराम पर सहमत हो जाते हैं, तो अमेरिका उन्हें व्यापार में मदद करेगा। अगर नहीं मानते हैं, तो कोई व्यापार नहीं होगा।”
हालांकि अब वे इस बयान से साफ मुकर गए हैं।
Pratham Tehelka Pratham Tehelka News
