चंडीगढ़,24 जनवरी : हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मानेसर भूमि घोटाले में बड़ा झटका लगा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट की सुनवाई पर लगी रोक 27 जनवरी के बाद खत्म हो जाएगी।
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हुड्डा इस भूमि घोटाले में मुख्य आरोपित हैं। उनके साथ तत्कालीन नौकरशाह राजीव अरोड़ा, एसएस ढिल्लों, छतर सिंह और एमएल तायल भी आरोपितों में शामिल हैं। इन सभी ने हुड्डा सरकार के दौरान विभिन्न प्रमुख पदों पर काम किया था। इसके अलावा, कई बिल्डरों को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है।
2020 से रुका है मामला
यह मामला दिसंबर 2020 से रुका हुआ है, जब कुछ आरोपित नौकरशाहों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगवा दी थी। हाईकोर्ट ने यह रोक पूर्व गृह सचिव राजीव अरोड़ा की याचिका पर लगाई थी।
सीबीआई ने की रोक हटाने की अपील
सीबीआई ने मामले की जल्द सुनवाई के लिए हाईकोर्ट में आवेदन दायर किया था। सीबीआई के वकील रवि कमल गुप्ता ने अदालत से निवेदन किया कि चार साल से लंबित मामले में अंतिम सुनवाई और निपटारा जल्द से जल्द हो।
हाईकोर्ट ने सीबीआई के आवेदन पर सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि 27 जनवरी को दोपहर 2:30 बजे से मामले की सुनवाई शुरू होगी और किसी भी परिस्थिति में इसे और आगे नहीं टाला जाएगा।
अदालत का आदेश
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं और सीबीआई के वकीलों को निर्देश दिया है कि 27 जनवरी से पहले अपनी लिखित दलीलें कोर्ट में पेश करें और उसकी प्रतियां एक-दूसरे को प्रदान करें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्थगन की तारीख के बाद अंतरिम आदेश प्रभावी नहीं रहेगा।
क्या है मानेसर भूमि घोटाला?
यह मामला 1,500 करोड़ रुपये के कथित भूमि घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि किसानों से सस्ती दर पर भूमि खरीदकर उसे ऊंचे दाम पर बिल्डरों को बेचा गया। हुड्डा और अन्य आरोपितों पर सीबीआई ने साजिश रचने, सरकारी पद का दुरुपयोग करने और अनियमितता का आरोप लगाया है।
अब इस मामले में 27 जनवरी के बाद ट्रायल कोर्ट में सुनवाई शुरू होने की संभावना है, जिससे हुड्डा और अन्य आरोपितों के लिए कानूनी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
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