Wednesday , 23 September 2026
नगोंया में चमका हरियाणा का लाल:
नगोंया में चमका हरियाणा का लाल:

जींद के हिमांशु ढिल्लों का एशियन गेम्स में कमाल, 10 मीटर एयर राइफल में जीते दो सिल्वर मेडल!

जींद: जापान के नगोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में हरियाणा के जींद जिले के गांव डाहौला के निशानेबाज हिमांशु ढिल्लों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया है। हिमांशु ने 10 मीटर एयर राइफल के टीम और व्यक्तिगत दोनों मुकाबलों में रजत पदक हासिल किए। उनकी इस उपलब्धि के बाद पैतृक गांव डाहौला में खुशी का माहौल है।

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दो सिल्वर मेडल जीतकर रचा इतिहास

हिमांशु ढिल्लों ने एशियन गेम्स में 10 मीटर एयर राइफल के टीम इवेंट और इंडिविजुअल इवेंट में सिल्वर मेडल अपने नाम किए। दोहरी सफलता मिलने की खबर जैसे ही गांव पहुंची, ग्रामीणों और परिवार के लोगों ने खुशी मनानी शुरू कर दी।

गांव में ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया गया और मिठाइयां बांटी गईं। ग्रामीणों ने हिमांशु के गांव लौटने पर उनके सम्मान में भव्य नागरिक अभिनंदन करने की भी घोषणा की है।

मुख्यमंत्री ने दी बधाई

हिमांशु की उपलब्धि पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमांशु की इस उपलब्धि से पूरे हरियाणा और देश को गर्व है।

दादी बोलीं- अब ओलंपिक गोल्ड का सपना

हिमांशु की दादी बीरमति अपने पोते की जीत से बेहद भावुक हैं। उन्होंने बताया कि परिवार देर रात तक टीवी के सामने बैठकर मुकाबला देख रहा था। दादी ने कहा कि हिमांशु ने बचपन से ही कड़ी मेहनत की है और अब परिवार का सपना उसे ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतते देखना है।

उन्होंने हिमांशु को बेहद सरल स्वभाव का बताते हुए कहा कि उसकी मेहनत ने परिवार के वर्षों पुराने सपने को पूरा किया है।

कुश्ती से शुरू हुआ सफर, चोट के बाद शूटिंग को बनाया करियर

हिमांशु के चाचा संदीप ढिल्लों के मुताबिक, हिमांशु और उसके भाई को शुरुआत में पुंडरी गुरुकुल भेजा गया था। वहां हिमांशु ने कुश्ती शुरू की, लेकिन अभ्यास के दौरान चोट लगने के बाद उसे कुश्ती छोड़नी पड़ी।

इसके बाद हिमांशु ने शूटिंग को अपना लक्ष्य बनाया। पुंडरी गुरुकुल में ही उसकी मुलाकात कोच कुलदीप से हुई। बाद में कोच के कैथल स्थित नैरा शूटिंग क्लब में जाने पर हिमांशु भी कैथल पहुंचा। बेहतर प्रशिक्षण और राष्ट्रीय स्तर के कैंपों के लिए आगे चलकर उसने दिल्ली में भी ट्रेनिंग ली।

सीमित साधनों के बावजूद परिवार ने नहीं छोड़ा साथ

खेती करने वाले चाचा संदीप ने बताया कि परिवार के पास सीमित संसाधन थे, लेकिन हिमांशु के खेल और प्रशिक्षण में कभी कमी नहीं आने दी गई। परिवार लंबे समय से उस दिन का इंतजार कर रहा था, जब हिमांशु अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी उपलब्धि हासिल करेगा।

हिमांशु की चाची किरण ने बताया कि शूटिंग की ट्रेनिंग और पढ़ाई को बेहतर तरीके से जारी रखने के लिए पूरा संयुक्त परिवार कैथल शिफ्ट हो गया था। उन्होंने कहा कि मुकाबला बेहद कड़ा था और स्कोर लगातार बदल रहा था, लेकिन हिमांशु की मेहनत आखिरकार रंग लाई।

अब ओलंपिक में गोल्ड जीतने का सपना

हिमांशु के परिवार का कहना है कि दो रजत पदक जीतने के बाद अब उनका सबसे बड़ा सपना उसे ओलंपिक के मंच पर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतते हुए देखना है।

गांव डाहौला से लेकर पूरे जींद जिले तक हिमांशु की इस उपलब्धि को लेकर गर्व और उत्साह का माहौल है। उनकी कहानी मेहनत, संघर्ष और सही मार्गदर्शन के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने वाले खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन रही है।

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