नई दिल्ली | 23 जून 2025 : मिडिल ईस्ट में भड़कते तनाव के बीच, अमेरिका ने ईरान की तीन न्यूक्लियर साइट्स—फोर्डो, नतांज और एसफाहान—पर बमबारी कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया कि “ईरान या तो शांति का रास्ता चुने या भारी तबाही झेले।” इस बयान के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का खतरा मंडरा रहा है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, यदि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद किया। यह मार्ग दुनिया के 25% तेल व्यापार का केंद्र है और भारत के 60% गैस व 50% तेल आयात के लिए अहम है।
भारत पर संभावित असर:
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महंगाई का झटका: कच्चा तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, खाद्य वस्तुएं, दूध, फल-सब्जियां और गैस की कीमतें बढ़ेंगी। इससे CPI महंगाई दर में 0.35% तक इजाफा हो सकता है।
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व्यापार संकट: भारत का वेस्ट एशिया के साथ ₹3.6 लाख करोड़ का व्यापार है। बासमती चावल, फर्टिलाइज़र और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात-आयात में रुकावट आ सकती है।
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रुपया और एक्सपोर्ट दबाव में: सप्लाई चेन में रुकावट से रुपया कमजोर हो सकता है और एक्सपोर्ट महंगा होगा।
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सोनो-मोबाइल तक असर: सोने की कीमत ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम तक जा सकती है, मोबाइल और खेती के उपकरण महंगे होंगे।
अगर यह युद्ध लंबा चला या ईरान की सत्ता अस्थिर हुई, तो इसका असर 2011 की लीबिया क्रांति से भी बड़ा हो सकता है। भारत को ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति स्रोतों में विविधता की रणनीति तुरंत मजबूत करनी होगी।
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