Thursday , 10 September 2026
भिवानी में भूकंप से बचाव की मॉक ड्रिल

भिवानी में भूकंप से बचाव की मॉक ड्रिल, 63 लोगों का किया गया रेस्क्यू; NDRF-SDRF ने संभाला मोर्चा|

भिवानी: हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी परिसर में गुरुवार को भूकंप जैसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए NDRF और SDRF की संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस दौरान बोर्ड की बिल्डिंग में भूकंप का काल्पनिक सीन तैयार किया गया और 63 लोगों के फंसे होने की स्थिति बनाकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।

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मॉक ड्रिल के दौरान NDRF, SDRF के साथ फायर ब्रिगेड और रेड क्रॉस की टीमें भी मौके पर मौजूद रहीं। सभी एजेंसियों ने मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया और आपदा की स्थिति में किस तरह तेजी से राहत एवं बचाव कार्य किया जाता है, इसका अभ्यास किया।

63 लोगों के फंसे होने का बनाया गया सीन

SDRF अधिकारी राजकुमार भौरिया ने बताया कि स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स से जुड़े अभ्यास के तहत शिक्षा बोर्ड की बिल्डिंग में भूकंप का काल्पनिक सीन तैयार किया गया था। इस दौरान कुल 63 लोगों के बिल्डिंग के अंदर फंसे होने की स्थिति बनाई गई।

मॉक ड्रिल में इनमें से 8 लोगों को गंभीर रूप से घायल दिखाया गया। अभ्यास के तहत गंभीर घायलों को उपचार के लिए सिविल अस्पताल में शिफ्ट करने की प्रक्रिया भी दिखाई गई।

फायर ब्रिगेड और रेड क्रॉस की टीमों ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन में हिस्सा लिया और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास किया। अधिकारियों के मुताबिक मॉक ड्रिल के दौरान किसी तरह की वास्तविक कैजुअल्टी नहीं हुई।

रेस्क्यू के बाद कर्मचारियों को दी गई ट्रेनिंग

रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद बोर्ड परिसर में ही कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन और भूकंप के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी गई।

SDRF अधिकारी राजकुमार भौरिया ने बताया कि आपदा के समय पैनिक होने से नुकसान बढ़ सकता है, इसलिए लोगों को घबराने के बजाय सही तरीके से प्रतिक्रिया करनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि अगर भूकंप के दौरान बाहर निकलने का सुरक्षित मौका नहीं मिले तो किसी मजबूत टेबल या फर्नीचर के नीचे जाकर Duck-Cover-Hold पोजीशन अपनानी चाहिए। इस दौरान सिर और शरीर को सुरक्षित रखना जरूरी है।

फंसे होने पर ऐसे दें रेस्क्यू टीम को सिग्नल

अधिकारियों ने कर्मचारियों को यह भी बताया कि अगर कोई व्यक्ति मलबे या बिल्डिंग के अंदर फंस जाए और बाहर निकलना संभव न हो, तो घबराने के बजाय रेस्क्यू टीम का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करनी चाहिए।

बोर्ड अध्यक्ष शंकर लाल धूपड़ ने बताया कि ऐसी मॉक ड्रिल का उद्देश्य कर्मचारियों को किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार करना है। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में भूकंप या किसी अन्य इमरजेंसी की स्थिति बनती है तो कर्मचारियों को पता होना चाहिए कि उन्हें क्या करना है।

उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि आपदा के समय पैनिक न करें और नुकीली या कांच की वस्तुओं के आसपास रहने से बचें। अगर कोई व्यक्ति अंदर फंस जाता है तो दीवार पर किसी धातु की वस्तु से आवाज करके रेस्क्यू टीम को अपनी मौजूदगी का संकेत दिया जा सकता है।

स्ट्रक्चर सेफ्टी जांच तक खाली रहेगी बिल्डिंग

मॉक ड्रिल के बाद बोर्ड की बिल्डिंग को स्ट्रक्चर सेफ्टी जांच तक खाली रखने की बात भी सामने आई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भवन की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर आवश्यक जांच पूरी की जा सके।

शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष ने मॉक ड्रिल के आयोजन के लिए NDRF और SDRF सहित सभी संबंधित टीमों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के अभ्यास कर्मचारियों को आपदा के समय बेहतर तरीके से तैयार करने में मदद करते हैं।

भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा को रोका नहीं जा सकता, लेकिन सही तैयारी, जागरूकता और समय पर रेस्क्यू से जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। भिवानी में आयोजित यह मॉक ड्रिल भी इसी तैयारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अभ्यास रहा।

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