चंडीगढ़, 14 जुलाई : हरियाणा के राज्यपाल के रूप में एक नया दौर शुरू हो गया है। प्रोफेसर अशीम कुमार घोष को हरियाणा का 19वां राज्यपाल नियुक्त किया गया है। सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनके नाम की आधिकारिक घोषणा की। इससे पहले यह जिम्मेदारी बंडारू दत्तात्रेय के पास थी, जिन्होंने 7 जुलाई 2021 से हरियाणा राज्यपाल के रूप में कार्य किया था।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!अशीम घोष पश्चिम बंगाल के हावड़ा से हैं और उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि काफी मजबूत है। वे 1999 से 2002 तक पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। यह उनके अनुभव और संगठन कौशल को दर्शाता है। घोष पश्चिम बंगाल से जुड़े तीसरे ऐसे राज्यपाल हैं, जो हरियाणा की राजभवन की बागडोर संभाल रहे हैं। इससे पहले बीरेंद्र नारायण चक्रवर्ती और हरी आनंद बरारी ने भी बंगाल से राज्यपाल के तौर पर सेवाएं दी हैं।
राजनीतिक सफर की बात करें तो, 2 जून 2013 को उन्होंने हावड़ा लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर उपचुनाव भी लड़ा था, जो तृणमूल कांग्रेस की सांसद अंबिका बनर्जी के निधन के बाद हुआ था। हालांकि, इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
हरियाणा में राज्यपाल के कार्यकाल के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो बीरेंद्र नारायण चक्रवर्ती का 8 साल 6 महीने से अधिक का कार्यकाल सबसे लंबा रहा है। वहीं, सबसे छोटा कार्यकाल ओम प्रकाश वर्मा का रहा, जो केवल 6 दिन तक राज्यपाल रहे थे।
अशीम घोष के हरियाणा के नए राज्यपाल बनने से राज्य में प्रशासनिक और राजनीतिक कार्यों में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। उनकी अनुभवसंपन्नता और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका हरियाणा के विकास और शांति के लिए लाभकारी साबित होगी।
यह नियुक्ति भाजपा के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे पार्टी की संगठनात्मक मजबूती और प्रभाव हरियाणा में और बढ़ेगा। अब देखना होगा कि प्रो. अशीम घोष अपने नए पद पर क्या नए आयाम जोड़ते हैं।
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