चंडीगढ़: इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के प्रदेशाध्यक्ष रामपाल माजरा ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में आयोजित प्रेसवार्ता में हरियाणा सरकार को कई मुद्दों पर घेरते हुए जेबीटी भर्ती, गेस्ट टीचर्स, हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN), फसल बीमा योजना, वकीलों की हड़ताल और जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े मामलों पर सवाल उठाए।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!3206 JBT भर्ती पर हाईकोर्ट के फैसले का किया स्वागत
रामपाल माजरा ने कहा कि वर्ष 2000 में इनेलो सरकार के दौरान हुई 3206 जेबीटी अध्यापकों की भर्ती को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने निष्पक्ष माना है। उनका दावा है कि इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि पूरा मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित था। उन्होंने कहा कि अदालत ने शेष 150 अभ्यर्थियों को बैकडेट से सभी सेवा लाभ देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही दावा किया कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह मेरिट के आधार पर हुई थी।
गेस्ट टीचर्स को नियमित न करने पर सरकार को घेरा
इनेलो नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा ने वर्ष 2014 के चुनावी घोषणा पत्र में गेस्ट टीचर्स को नियमित करने का वादा किया था, लेकिन आज तक उसे पूरा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद भी सरकार नियमितीकरण के बजाय कानूनी चुनौती देने का रास्ता अपना रही है, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।
HKRN पर लगाए गंभीर आरोप
रामपाल माजरा ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा देने का वादा पूरा नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि सेवा सुरक्षा संबंधी कानून पारित होने के बावजूद उसका लाभ कर्मचारियों तक नहीं पहुंचा है। साथ ही उन्होंने निगम में अनियमितताओं और घोटालों के आरोप भी लगाए।
NHM कर्मचारियों और वकीलों का मुद्दा भी उठाया
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर भी अदालत निर्देश दे चुकी है, लेकिन सरकार ने समय पर कार्रवाई नहीं की।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में वकीलों की हड़ताल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम में नए वकीलों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे, जिससे असंतोष बढ़ा है।
फसल बीमा और जंतर-मंतर समझौते पर भी सवाल
रामपाल माजरा ने आरोप लगाया कि फसल बीमा योजना का किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला, जबकि जनता पर करों का बोझ बढ़ा है।
उन्होंने जंतर-मंतर आंदोलन के बाद हुए समझौते का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने प्रदर्शनकारी युवाओं से किए गए सभी वादे पूरे नहीं किए हैं। उनका आरोप है कि मुकदमे वापस लेने और अन्य आश्वासनों पर पूरी तरह अमल नहीं हुआ।
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