Saturday , 25 July 2026
India-US Relations

India-US Relations: अमेरिकी टैरिफ के बीच PM मोदी अगले महीने कर सकते हैं ट्रंप से मुलाकात

India-US Relations: भारत और अमेरिका के बीच चल रहे व्यापारिक तनाव और टैरिफ विवादों के बीच PM नरेंद्र मोदी की अगले महीने अमेरिका यात्रा और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से संभावित मुलाकात पर कूटनीतिक नजरें टिक गई हैं। अगर यह मुलाकात होती है, तो यह दोनों नेताओं के बीच मात्र सात महीनों में दूसरी बार आमना-सामना होगा। फरवरी में PM मोदी का व्हाइट हाउस दौरा इस रिश्ते में गर्मजोशी लेकर आया था, लेकिन अब व्यापार और टैरिफ को लेकर पैदा हुए मतभेद ने संबंधों में खिंचाव पैदा किया है।

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संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर बैठक की संभावना

सितंबर 2025 में न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान दुनिया के प्रमुख नेता एक बार फिर वैश्विक एजेंडा तय करेंगे। इसी समय PM मोदी अमेरिका का दौरा कर सकते हैं, जहां ट्रंप से उनकी मुलाकात इस संबंध में एक अहम मोड़ साबित हो सकती है। यह बैठक द्विपक्षीय व्यापार, टैरिफ विवाद और भू-राजनीतिक मसलों पर महत्वपूर्ण बातचीत का अवसर दे सकती है।

टैरिफ विवाद ने बढ़ाई खींचतान

भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर लंबी बातचीत जारी है, लेकिन भारत की कृषि और डेयरी क्षेत्रों में अनिच्छा के कारण समझौता लंबित है। इसी के बीच ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाया और रूस से तेल खरीद के लिए अतिरिक्त 25% शुल्क जोड़ा, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया। आधे टैरिफ 7 अगस्त से और बाकी 27 अगस्त से लागू होंगे। दोनों देशों की हाई-लेवल वार्ता इस टकराव को सुलझाने के लिए जारी है।

रूस से तेल खरीद पर मतभेद बढ़ा तनाव

यूक्रेन युद्ध के बीच भारत द्वारा रूस से तेल खरीदना अमेरिका के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह राजस्व मॉस्को के युद्ध प्रयासों को बढ़ावा देता है। ट्रंप ने भारत पर दबाव बनाया है कि वह आयात कम करे ताकि रूस पर आर्थिक दबाव बने। भारत ने इसे दोहरे मानकों वाला फैसला बताया, क्योंकि अमेरिकी कंपनियां रूस से यूरेनियम, रसायन और उर्वरक खरीदती हैं। इस विवाद ने कूटनीतिक तनाव को और गहरा किया है।

15 अगस्त को पुतिन-ट्रंप बैठक की भी रहेगी बड़ी भूमिका

इस पूरी स्थिति में 15 अगस्त को ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली बैठक पर भारत की खास निगाह है। यह बैठक यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के संभावित रास्तों पर चर्चा करेगी। भारत इसे अपनी ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण अवसर मान रहा है।

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