चंडीगढ़, 18 सितंबर। हरियाणा में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसी कड़ी में ‘पंडित दीन दयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना’ पशुपालकों के लिए आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सरकार के अनुसार, योजना के तहत सामान्य श्रेणी के पशुपालकों को बीमा प्रीमियम पर 85 प्रतिशत सहायता दी जा रही है, जबकि अनुसूचित जाति परिवारों के लिए प्रीमियम पर 100 प्रतिशत सहायता का प्रावधान है।
31 अगस्त 2026 तक प्रदेश में 19.91 लाख पशुओं का बीमा किया जा चुका है। वहीं, वर्ष 2018-19 से 31 अगस्त 2026 तक 32,679 पशु बीमा दावों का निपटारा किया गया है और पशुपालकों को कुल 123.68 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई है।
पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने पर जोर
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के अनुसार, प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र की भूमिका को और मजबूत करने के लिए सरकार काम कर रही है। इसका उद्देश्य पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पशुधन की उत्पादकता, स्वास्थ्य और नस्ल सुधार को बढ़ावा देना है।
सरकार की ओर से पशुपालकों को आर्थिक सहायता के साथ आधुनिक पशु चिकित्सा और प्रजनन सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
दूध उत्पादन में हरियाणा की मजबूत स्थिति
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा में दुग्ध उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। प्रदेश में पशुधन की संख्या बढ़ने के साथ प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दूध की उपलब्धता में भी वृद्धि हुई है।
प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता के मामले में हरियाणा पंजाब और राजस्थान के बाद देश में तीसरे स्थान पर है।
भेड़-बकरी और सूअर पालन के लिए अनुदान
पशुपालन को ग्रामीण परिवारों के लिए स्वरोजगार का माध्यम बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता दी जा रही है।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत भेड़, बकरी, सूअर पालन और चारा उत्पादन के लिए 10 लाख से 50 लाख रुपये तक की अनुदान सहायता का प्रावधान है। इसके तहत अब तक 10 लाभार्थियों को 2.62 करोड़ रुपये की अनुदान राशि जारी की गई है।
मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना के तहत स्वरोजगार योजनाओं के लिए प्राप्त 93,870 आवेदनों में से 31 मार्च 2026 तक 87,770 आवेदन बैंकों को भेजे गए। इस योजना के माध्यम से अब तक 37,337 पशुपालक लाभान्वित हुए हैं।
2.31 लाख पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड स्वीकृत
पशुपालकों को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने के लिए बैंकों के माध्यम से पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड भी जारी किए जा रहे हैं।
सरकार के अनुसार, मई 2026 तक 2.31 लाख पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड स्वीकृत किए जा चुके हैं और करीब 3,478 करोड़ रुपये की राशि किसानों को वितरित की गई है।
देशी नस्लों के संरक्षण और सुधार पर फोकस
हरियाणा में देशी पशु नस्लों के संरक्षण और आनुवंशिक सुधार को भी प्राथमिकता दी जा रही है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत हिसार स्थित राजकीय पशुधन फार्म में गोकुल ग्राम स्थापित किया गया है।
हिसार में करीब 18.63 करोड़ रुपये की लागत से सेक्स-सॉर्टेड सीमेन प्रयोगशाला का निर्माण पूरा हो चुका है। यहां सांडों की टेस्टिंग की जा रही है और टेस्टिंग पूरी होने के बाद सेक्स-सॉर्टेड सीमेन का उत्पादन शुरू किया जाएगा।
सरकार के अनुसार इससे उच्च गुणवत्ता वाले पशुधन के विस्तार और दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
हरियाणा में पशु प्रजनन को लेकर कानून
हरियाणा पशु पंजीकरण, प्रमाणीकरण एवं प्रजनन अधिनियम, 2019 के जरिए पशु प्रजनन गतिविधियों को विनियमित किया गया है। सरकार के अनुसार, पशुओं के कल्याण और आनुवंशिक सुधार के लिए इस तरह का कानून बनाने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य बना।
पशु स्वास्थ्य सेवाओं का भी विस्तार
वर्तमान सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में 138 नए सरकारी पशु अस्पताल बनाए गए हैं। इसके साथ पशुओं में होने वाली बीमारियों की जांच और उपचार की सुविधाओं को भी मजबूत किया जा रहा है।
हिसार में नई BSL-2 प्रयोगशाला स्थापित की गई है, जबकि पंचकूला और सोनीपत में भी प्रयोगशालाएं स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है।
पशुओं को संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए नियमित टीकाकरण अभियान चलाए जा रहे हैं। राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत हर छह महीने में करीब 55 लाख मवेशियों का खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए टीकाकरण किया जाता है।
इसके अलावा, ब्रुसेला टीकाकरण अभियान के तहत मई 2026 तक 13.86 लाख बछड़ियों और गायों का टीकाकरण किया जा चुका है।
गौशालाओं को भी करोड़ों रुपये की सहायता
गोवंश संरक्षण को लेकर भी सरकार की ओर से वित्तीय सहायता दी जा रही है। पिछले छह वर्षों में प्रदेश की गौशालाओं को करीब 530 करोड़ रुपये अनुदान के रूप में दिए जाने की जानकारी सरकार ने दी है।
वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदेश की 619 पंजीकृत गौशालाओं और नंदीशालाओं में गोवंश एवं पुनर्वासित गोवंश के लिए चारा अनुदान के तौर पर 228.58 करोड़ रुपये दिए गए।
वहीं, चालू वित्त वर्ष में अब तक गोसेवा आयोग के साथ पंजीकृत 707 गौशालाओं को चारा अनुदान की पहली किस्त के रूप में 125 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
महिलाओं और अनुसूचित जाति परिवारों के लिए विशेष सहायता
सरकार की ओर से अनुसूचित जाति के पशुपालकों को डेयरी और सूअर पालन इकाइयां स्थापित करने के लिए 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इस योजना से 22,010 लाभार्थियों के लाभान्वित होने की जानकारी दी गई है।
भेड़-बकरी पालन योजना के तहत अनुसूचित जाति के पशुपालकों को 15 मादा और एक नर की इकाई स्थापित करने के लिए 90 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इसके तहत 4,902 लाभार्थी लाभान्वित हुए हैं।
सामान्य और अन्य वर्गों के लिए वर्ष 2018-19 से भेड़-बकरी और सूअर पालन इकाइयां स्थापित करने के लिए 25 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। अब तक 825 इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं।
महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए एक दुधारू पशु की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए एक लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
वर्ष 2025-26 में हाईटेक मिनी डेयरी योजना के तहत 1,016 डेयरी इकाइयां स्थापित हुईं, जिनमें 324 इकाइयां महिलाओं ने स्थापित कीं। वर्ष 2026-27 में अब तक 15 इकाइयां स्थापित की गई हैं।
उन्नत नस्ल के पशुओं पर प्रोत्साहन
अधिक दूध देने वाली हरियाणा, साहीवाल और बेलाही नस्ल की गायों के पालकों को 5,000 से 20,000 रुपये तक प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इस योजना से 21,521 पशुपालक लाभान्वित हुए हैं।
इसी तरह प्रतिदिन 18 किलोग्राम से अधिक दूध देने वाली मुर्राह भैंसों के मालिकों को 20,000 से 40,000 रुपये तक प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इस योजना से 14,512 पशुपालक लाभान्वित हुए हैं।
बैकयार्ड पोल्ट्री को भी बढ़ावा
ग्रामीण परिवारों के लिए बैकयार्ड कुक्कुट इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए लाभार्थियों को 10 दिन के 50 चूजे, 2 फीडर और 2 ड्रिंकर घर-द्वार पर निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
सरकारी जानकारी के अनुसार, अगस्त 2026 तक इस योजना के तहत 5,230 इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के अनुसार, सरकार का उद्देश्य पशुपालन को केवल पारंपरिक गतिविधि तक सीमित रखने के बजाय किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी और लाभकारी आय का जरिया बनाना है। पशुधन बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, नस्ल सुधार, आधुनिक प्रयोगशालाओं, टीकाकरण, डेयरी इकाइयों के लिए वित्तीय सहायता और गौशालाओं को अनुदान जैसी योजनाओं के जरिए पशुपालकों को आर्थिक रूप से मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
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