मोहाली | 4 अगस्त 2025 : पंजाब में 1993 के एक दिल दहला देने वाले फर्जी एनकाउंटर केस में आखिरकार 32 साल बाद इंसाफ मिला है। सोमवार को CBI की स्पेशल कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए रिटायर्ड SSP भूपेंद्रजीत सिंह, DSP दविंदर सिंह, इंस्पेक्टर सूबा सिंह, ASI गुलबर्ग सिंह और ASI रघबीर सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!क्या था मामला?
1993 में तरनतारन जिले में पुलिस ने 7 लोगों को दो अलग-अलग मुठभेड़ों में आतंकवादी बताकर मारने का दावा किया था। लेकिन CBI जांच में खुलासा हुआ कि ये सभी फर्जी एनकाउंटर थे। जिन 7 लोगों को मार गिराया गया, उनमें से 4 स्पेशल पुलिस ऑफिसर (SPO) के पद पर कार्यरत थे।
कैसे हुआ खुलासा?
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पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने दिखाया कि मरने से पहले पीड़ितों को बेरहमी से पीटा गया था।
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फोरेंसिक जांच में सामने आया कि मुठभेड़ में इस्तेमाल हथियारों को लेकर पुलिस का दावा झूठा था।
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शवों को पहचान होते हुए भी लावारिस बताकर चुपचाप अंतिम संस्कार कर दिया गया।
कैसे आगे बढ़ा केस?
CBI ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच की शुरुआत की थी। 1999 में शिंदर सिंह की पत्नी नरिंदर कौर की शिकायत के आधार पर केस दर्ज हुआ। ट्रायल के दौरान 10 में से 5 आरोपी पुलिसकर्मियों की मौत हो गई, जबकि बाकी 5 को अब उम्रकैद मिली है।
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