चंडीगढ़: हरियाणा में कारोबार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार नियामकीय प्रक्रियाओं को आसान बनाने और अनुपालन का बोझ कम करने पर लगातार काम कर रही है। राज्य में अनुपालन न्यूनीकरण और डीरेगुलेशन अभियान के तहत 8 प्राथमिक क्षेत्रों में सुधार लागू किए जा चुके हैं, जबकि 14 अन्य क्षेत्रों में सुधार की प्रक्रिया जारी है। इन सुधारों को अगले माह तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सरकार का उद्देश्य अनावश्यक प्रक्रियाओं, दोहराए जाने वाले अनुमोदनों और अतिरिक्त अनुपालनों को कम करना है, ताकि नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों को सरकारी सेवाएं अधिक सरल और समयबद्ध तरीके से मिल सकें।
केंद्रीय स्तर पर हुई समीक्षा के बाद हरियाणा ने बताई प्रगति
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने केंद्रीय कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में अनुपालन न्यूनीकरण और डीरेगुलेशन अभियान के पहले और दूसरे चरण की प्रगति की समीक्षा के बाद हरियाणा में किए जा रहे सुधारों की जानकारी दी।
राज्य के सुधार एजेंडे में भूमि विनियमन, निर्माण, बिजली, उपयोगिताओं, औद्योगिक विकास, पर्यावरण, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में प्रक्रियाएं होंगी आसान
स्वास्थ्य क्षेत्र में चिकित्सा व्यवसायियों के पंजीकरण और एनओसी से जुड़ी आवश्यकताओं को सरल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लाइसेंस के लिए एकल नोडल व्यवस्था विकसित की जा रही है।
इसके साथ ही स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों से जुड़ी सेवाओं को इन्वेस्ट हरियाणा पोर्टल के साथ जोड़ने का प्रस्ताव है। इससे अलग-अलग विभागों से संबंधित प्रक्रियाओं को एक ही सुव्यवस्थित व्यवस्था के तहत संचालित करने में मदद मिलेगी।
दोहरी लाइसेंस व्यवस्था खत्म करने की तैयारी
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक यश गर्ग के अनुसार, व्यवसायों के लिए दोहरी लाइसेंस व्यवस्था खत्म करने के हरियाणा के प्रस्ताव को डीरेगुलेशन सेल से सहमति और स्वीकृति मिल गई है।
इसका उद्देश्य एक जैसे या एक-दूसरे से जुड़े लाइसेंस, परमिट, एनओसी और अनुमोदनों को कम करना है, ताकि कारोबारियों पर अनावश्यक अनुपालन का बोझ न पड़े।
दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के नियम होंगे सरल
दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से जुड़े नियमों को भी सरल बनाया जा रहा है। हरियाणा की दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान व्यवस्था के तहत एकमुश्त पंजीकरण की व्यवस्था पहले ही लागू की जा चुकी है।
सरकार का लक्ष्य कारोबारियों के लिए प्रक्रियाओं को और आसान बनाना और अनावश्यक औपचारिकताओं को कम करना है।
MSME को भी मिलेगी राहत
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को सुविधा देने के लिए भी कई सुधारों पर काम किया जा रहा है। इनमें स्व-घोषणा, स्थापना से पहले जरूरी अनुमोदनों को सरल करना और निरीक्षण से संरक्षण जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
औद्योगिक क्लस्टरों में मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए HSIIDC और हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केंद्र की भूमिका को भी मजबूत किया जा रहा है।
औद्योगिक प्लॉटों के विभाजन को मिली अनुमति
औद्योगिक प्लॉटों के उपयोग में लचीलापन बढ़ाने के लिए भी नियमों में बदलाव किया गया है। HSIIDC के निदेशक मंडल ने औद्योगिक प्लॉटों, जिनमें खाली प्लॉट भी शामिल हैं, को अधिकतम तीन प्लॉटों में विभाजित करने की अनुमति दी है।
हालांकि, विभाजन के बाद प्रत्येक प्लॉट का क्षेत्रफल कम से कम 450 वर्ग मीटर होना जरूरी होगा। यह अनुमति नियोजन मानकों, व्यवहार्यता और लागू शुल्कों के अधीन रहेगी।
‘वॉक-टू-वर्क’ को बढ़ावा देने की तैयारी
औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए कार्यस्थल के नजदीक आवास की सुविधा विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। HSIIDC ने IMT मानेसर के सेक्टर-8 में 4.6 एकड़ क्षेत्र में औद्योगिक श्रमिक आवास का निर्माण किया है।
वहीं, इंडस्ट्रियल एस्टेट कुंडली में 6 एकड़ क्षेत्र में इसी तरह की सुविधा विकसित की जा रही है।
पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रस्तावित 500 करोड़ रुपये के ‘सक्षम’ फंड के माध्यम से इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड करने की योजना है।
इसके अलावा HSIIDC की ओर से साझा अग्निशमन बुनियादी ढांचे के लिए नई नीति भी जारी की गई है।
राइट टू बिजनेस व्यवस्था से तेज होंगी मंजूरियां
प्रदेश में राइट टू बिजनेस व्यवस्था के तहत शपथ-पत्र आधारित स्वीकृति प्रणाली भी लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य पात्र कारोबारियों और उद्यमों को जरूरी मंजूरियां तेजी से उपलब्ध कराना और स्थापना से पहले कई अलग-अलग अनुमोदनों पर निर्भरता कम करना है।
सरकार के अनुसार, यह व्यवस्था विश्वास आधारित नियमन की दिशा में किए जा रहे व्यापक सुधारों का हिस्सा है।
समय-सीमा में पूरे होंगे लंबित सुधार
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने कहा कि लंबित सुधारों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाएगा। सरकार का फोकस अनुपालन का बोझ कम करने, सेवाओं को समयबद्ध और आसान बनाने तथा नागरिकों और कारोबारियों के लिए बेहतर कारोबारी माहौल तैयार करने पर है।
इन सुधारों के लागू होने से राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक सरल बनाने पर जोर रहेगा।
Pratham Tehelka Pratham Tehelka News
