नई दिल्ली, 20 जून 2025: हरियाणा कांग्रेस में संगठनात्मक सुधार और जिलास्तर पर नेतृत्व तय करने को लेकर कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी आज दिल्ली में बड़ा मंथन करेंगे। इस बैठक के लिए राहुल गांधी ने हरियाणा के सभी 22 जिलों में तैनात केंद्रीय पर्यवेक्षकों को तलब किया है। बैठक में जिलों में चल रही गुटबाजी, अनुशासनहीनता और नेताओं द्वारा पर्यवेक्षकों पर दबाव जैसे मुद्दों पर भी गहन चर्चा होगी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!जिलाध्यक्ष चयन को लेकर फाइनल राउंड
कांग्रेस संगठन ने हरियाणा के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति प्रक्रिया को गति देने के लिए प्रत्येक जिले में एक केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। इन्हें 30 जून तक छह-छह नामों का पैनल तैयार कर भेजना है। यह पैनल किसी राज्य प्रभारी को नहीं, बल्कि सीधे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की विशेष ईमेल पर भेजा जाएगा। इससे प्रक्रिया को पारदर्शी और केंद्रीय नेतृत्व के नियंत्रण में रखा गया है।
संगठनात्मक सुधार पर फोकस
सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी पर्यवेक्षकों से यह जानने की कोशिश करेंगे कि किन जिलों में संगठन मजबूत है और कहां पर आपसी खींचतान या अनुशासन की समस्याएं बनी हुई हैं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि किसी भी नेता ने पर्यवेक्षकों पर राजनीतिक या गुटीय दबाव तो नहीं डाला। कई जिलों से ऐसे इनपुट मिले हैं, जहां नेताओं के बीच टकराव के चलते संगठनात्मक कामकाज प्रभावित हुआ है।
प्रदेश प्रभारी और सह-प्रभारियों की सक्रिय भूमिका
हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी बीके हरिप्रसाद भी खुद मैदान में हैं और अब तक सात जिलों का दौरा कर चुके हैं। सह प्रभारी जितेंद्र बघेल और प्रफुल्ल गुडचे राज्य के 12 और 10 जिलों की निगरानी कर रहे हैं। सभी जिलों में संगठन की स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है।
प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा बाद में
कांग्रेस ने यह स्पष्ट किया है कि नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के बाद ही प्रदेश अध्यक्ष का नाम घोषित किया जाएगा। पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि राहुल गांधी के हालिया चंडीगढ़ दौरे में प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान हो सकता है, लेकिन अब पार्टी हाईकमान ने यह निर्णय लिया है कि पहले नीचे से ऊपर की ओर संगठन को मज़बूत किया जाएगा।
जातीय संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर ध्यान
प्रदेश अध्यक्ष के चयन में जातीय संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को भी ध्यान में रखा जाएगा। इसके बाद विधायक दल के नेता के नाम पर विचार होगा। कांग्रेस के लिए यह प्रक्रिया 2024 लोकसभा चुनावों में मिली हार के बाद खुद को हरियाणा में दोबारा खड़ा करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
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