चंडीगढ : हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बिजली के मुददे पर कहा कि हमने कभी नहीं कहा कि हम बिजली मुफत में देंगें, जबकि विपक्ष इस मुददे पर झूठ बोल रहा है। उन्होंने कहा कि दस साल के बाद बिजली की दरों में मामूली बढौतरी की गई है, जबकि इन दस सालों में महंगाई भी बढी है और बिजली बनाने के लिए हर चीज के दामों में बढौतरी हुई। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जो कहा है वह करके दिखाया है अर्थात मोदी है तो मुमकिन है। ऐसे ही, विज ने बंगाल में हिन्दूत्व खतरे में है, के संबंध में कहा कि ‘‘कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी। सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-ज़माँ हमारा’’। विज मीडिया कर्मियों के द्वारा विपक्ष के बिजली की दरों में की गई बढौतरी के बारे में प्रदर्शन करने के संबंध में पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!2014-15 की तुलना में 75% तक कमी आई
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि 2 किलोवॉट तक के घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक बिल में साल 2014- 2015 की तुलना में 49 से 75 प्रतिशत तक की कमी आई है जबकि श्रेणी- 2 के अधिकांश उपभोक्ताओं के बिलों में कमी दर्ज की गयी है। उन्होंने कहा कि श्रेणी – 1 और श्रेणी – 2 में लगभग 94 प्रतिशत बिजली के उपभोक्ता आते है, जिनके अधिकांश मासिक बिलों में कमी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि हरियाणा में घरेलू श्रेणी के लिए निश्चित शुल्क (फिक्स्ड चार्जेस) 0 रुपये से 75 रुपये/किलोवाट तक और उच्चतम ऊर्जा स्लैब 7.50 रुपये/यूनिट पर बनाए रखा गया है। जबकि, इसके विपरीत, पड़ोसी राज्यों में निश्चित शुल्क 110 रुपये/किलोवाट तक और ऊर्जा शुल्क 8 रुपये/यूनिट तक है।
कृषि उपभोक्ताओं को पुरानी दरों पर बिजली
उन्होंने कहा कि हरियाणा में कृषि उपभोक्ताओं को पहले की तरह केवल 10 पैसे/यूनिट (मीटर्ड) और 15 रुपये/बीएचपी/माह (फ्लैट रेट) का भुगतान करने के तहत बिजली मुहैया करवाई जा रही है। इसी प्रकार, मीटर वाले कनेक्शन के लिए एमएमसी को घटाकर 180 रुपये (15 बीएचपी तक) और 144 रुपये (15 बीएचपी से ऊपर) कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, श्रेणी-2 के उपभोक्ताओं (5 किलोवाट तक के कनेक्टेड लोड वाले) के लिए, वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में बिलों में 3 प्रतिशत से 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि, वित्तीय वर्ष 2014-15 की तुलना में, इस श्रेणी के अधिकांश उपभोक्ताओं के बिलों में कमी दर्ज की गयी है, जिसमें केवल कुछ स्लैब में 1 प्रतिशत से कम की वृद्धि देखी गई है।
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