अंबाला , 29 जुलाई: हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन और श्रम मंत्री अनिल विज ने लोकसभा में चल रही बहस को लेकर पाकिस्तान और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने इसे एक ’20-20 मैच’ से तुलना करते हुए कहा कि भारत की तरफ से भारतीय जनता पार्टी और उसकी सहयोगी पार्टी खेल रही हैं, जबकि पाकिस्तान की तरफ से कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियां मैदान में हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!अनिल विज ने इस बयान के साथ यह भी स्पष्ट किया कि इस मैच का नतीजा पहले से तय है और इसमें जीत भारत की ही होगी। उनका कहना था, “सारा हिंदुस्तान देख रहा है, नतीजा सबको मालूम है।”
पाकिस्तान से बदला लेने की बात करते हुए अनिल विज का बयान
विशेष रूप से ऑपरेशन महादेव और श्रीनगर के पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए मास्टरमाइंड सुलेमान शाह उर्फ मूसा के संदर्भ में अनिल विज ने कहा, “हमारी सरकार आतंकवाद को समाप्त करने के लिए संकल्पित है। देश की अस्मिता पर हमला करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।”
उन्होने पाकिस्तान पर आरोप लगाते हुए कहा कि हिंदुस्तान में होने वाली आतंकवादी गतिविधियां अक्सर पाकिस्तान की साजिश होती हैं। “आतंकी और पाकिस्तान सेना में फर्क इतना ही है कि पाकिस्तान की सेना वर्दी में होती है, जबकि आतंकी बिना वर्दी के होते हैं,” विज ने कहा।
भारत सरकार ने पाकिस्तान को दिया सबक
अनिल विज ने यह भी जोर दिया कि भारत सरकार ने आतंकवादियों और पाकिस्तान दोनों को एक साथ सबक सिखा दिया है। उनका कहना था, “हमने पाकिस्तान को भी सख्त संदेश भेजा है और आतंकवादियों को भी यह बता दिया है कि उनकी करतूतों का कोई परिणाम जरूर होगा।”
इस बयान से साफ है कि भाजपा सरकार आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति में पूरी तरह से कठोर और निर्णायक रही है। अनिल विज ने पाकिस्तान और आतंकवादियों के खिलाफ अपनी सरकार की कार्रवाइयों को मजबूती से समर्थन दिया और कहा कि भारत कभी भी आतंकवादियों और उनके सरपरस्तों को नहीं छोड़ेगा।
देश के प्रति विश्वास और सुरक्षा की प्रतिबद्धता
मंत्री अनिल विज ने इस बयान के साथ भारत सरकार की सुरक्षा नीति को लेकर देशवासियों में विश्वास जगाया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए आतंकवाद के खिलाफ हर संभव कदम उठाने के लिए तैयार है।
इस दौरान, विज ने यह भी कहा कि लोकसभा की बहस में विपक्ष को भी आतंकवाद और पाकिस्तान के खिलाफ भारत की नीति का समर्थन करना चाहिए, क्योंकि यह मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और इस पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं हो सकता।
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