चण्डीगढ़, 7 जुलाई । हरियाणा के हिसार जिले के मिर्चपुर के भाल पर वर्ष 2010 में एक बडा धब्बा तब लगा था जबकि हिंसा के हाथों अनुसूचित जाति के करीब ढाई सौ परिवारों को उजाड दिया गया था। अब प्रदेश की मौजूदा भाजपा सरकार इस धब्बे को धोने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शनिवार को गांव ढंढूर में इन उजडे लोगों को फिर बसाने के लिए एक आवासीय परियोजना की आधाशिला रखी।
वर्ष 2010 में 24 अप्रेल को मिर्चपुर के एक समुदाय की भीड ने साठ वषीय दलित ताराचंद और उसकी 17 वर्षीय बेटी सुमन को जिंदा जला दिया था। इससे पहले भी मिर्चपुर में ही वर्ष 2007 में पांच दलितों को नंगा कर घुमाने और उत्पीडन की घटना हुई थी। मिर्चपुर में दलित उत्पीडन से पहले करनाल जिले के सालवान में वर्ष 2007 में हुई दलित उत्पीडन,वर्ष 2005 में गोहाना में और 2003 में झज्जर में हुई दलित उत्पीडन की घटनाएं हुई थीं।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि कहा कि यह पुनर्वास परियोजना पार्टी के प्रेरणा स्रोत पंडित दीनदयाल की सोच के अनुरूप बनाई गई है, इसलिए मेरा सुझाव है कि इसका नाम दीनदयाल पुरम रखा जाए। इस क्षेत्र में एक पार्क भी विकसित किया जाए, जिसका नाम भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय पार्क रखा जाए।
गौरतलब है कि गांव ढंढूर में 8 एकड़ जमीन पर मिर्चपुर के 258 विस्थापित परिवारों के रहने की व्यवस्था की जाएगी, जिस पर 4 करोड़ 56 लाख रुपये की राशि खर्च की जाएगी। उन्होंने कहा कि सामाजिक प्राणी होने के नाते हम सभी का दायित्व बनता है कि हम एक-दूसरे का पूरक बनकर समाज व प्रदेश में समरसता की भावना को मजबूत करने का काम करें। उन्होंने कहा कि यह बड़े ही दुख की बात है कि मिर्चपुर में वर्ष 2010 में इस दुखद घटना के चार साल बाद तक तत्कालीन सरकार ने कोई समाधान नहीं निकाला। उस समय हम विपक्ष में थे और हमने इस समस्या के हल के लिए प्रयास जारी रखा। इसके लिए हमने दोनों पक्षों से बातचीत करने के साथ-साथ विभागों को भी इस समस्या के निदान का माध्यम बनाया है। हमनें जब देखा कि इस समस्या का समाधान केवल उजडे लोगों का पुनर्वास ही है, तो सरकार ने भारतीय जनता पार्टी के प्रेरणा स्रोत पंडित दीनदयाल उपाध्यास की सोच के अनुरूप गांव ढंढूर में मिर्चपुर विस्थापितों के पुनर्वास करने का निर्णय लिया।
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