फरीदाबाद: शहर में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को 31 दिन हो गए हैं। इसी बीच आज प्रदेशभर में सफाई कर्मचारियों की ओर से मंत्रियों के कार्यालयों के बाहर झाड़ू प्रदर्शन किया गया। फरीदाबाद में भी बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के कार्यालय पहुंचे और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सरकार से मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील
प्रदर्शन के दौरान सफाई कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान बलबीर बालगुहेर ने सरकार से कर्मचारियों की मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से कहा कि मुख्यमंत्री जो भी फैसला लेंगे, कर्मचारी उसे स्वीकार करेंगे।
बलबीर बालगुहेर ने कहा कि यह अच्छी बात है कि सरकार सफाई कर्मचारियों की समस्या के समाधान के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि आज भी सरकार की ओर से बैठक बुलाई गई है। कर्मचारी नेता ने अपील की कि सरकार बातचीत के दौरान कर्मचारियों की बात भी सुने।
कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मुख्य मांग
सफाई कर्मचारी नेताओं के मुताबिक उनकी मुख्य मांग कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की है। कर्मचारी नेता ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का फैसला लेते हैं तो कर्मचारी अपनी हड़ताल खुद समाप्त कर देंगे।
उन्होंने मुख्यमंत्री को कर्मचारियों के हित में फैसला लेने की अपील करते हुए कहा कि सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत से इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
पुलिस की सरकारी गाड़ी पर चढ़कर की नारेबाजी
प्रदर्शन के दौरान सफाई कर्मचारी नेता बलबीर बालगुहेर के पुलिस की सरकारी स्कॉर्पियो गाड़ी की छत पर चढ़कर नारेबाजी करने का मामला भी सामने आया।
इस पर सफाई कर्मचारी नेता ने कहा कि संभव है कि जोश में उनसे ऐसा हुआ हो, लेकिन वह कानून का सम्मान करते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन के दौरान बारिश हो रही थी और कर्मचारियों में काफी जोश था, जिसके चलते वह गाड़ी पर चढ़ गए।
बलबीर बालगुहेर ने कहा कि अगर उनके इस कदम से कानून का उल्लंघन हुआ है तो वह अपनी गलती मानते हैं।
बैठक के बाद फैसले का इंतजार
फरीदाबाद में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल लगातार 31वें दिन भी जारी है। वहीं सरकार की ओर से कर्मचारियों की मांगों को लेकर बैठक किए जाने के बाद अब समाधान की उम्मीद बढ़ी है।
अब सभी की नजरें सरकार और कर्मचारी नेताओं के बीच होने वाली बातचीत पर हैं। देखना होगा कि बैठक के बाद कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने समेत अन्य मांगों पर सरकार की ओर से क्या फैसला लिया जाता है।
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