इतने बड़े चिप्स पैकेट के आधे हिस्से में चिप्स होता है और आधे में हवा भरी होती है। आखिर कंपनियां ऐसा क्यों करती हैं। क्या वो हमारे साथ धोखेबाजी करती हैं या कोई और वजह है। चिप्स पैकेट को जब खोलते हैं तो अंदर से एक गैस निकलती है जिसे हम फील भी नहीं कर पाते हैं। उसकी गंध कैसी है वो भी नहीं जान पाते। गैस की महक चिप्स के टेस्ट में खो जाती है। ऐसे में हम जान ही नहीं पाते हैं कि पैकेट खोलने पर कौन सी गैस निकली। तो आज जान लीजिए। वो नाइट्रोजन गैस होती है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!चिप्स पैकेज में नाइट्रोजन गैस भरने की एक खास वजह है : –
- नाइट्रोजन गैस भरने से चिप्स कुरकुरे बने रहते हैं जबकि ऑक्सीजन गैस भरी जाए तो चिप्स जल्दी ही खराब हो जाएंगे।
- पैकेट में नाइट्रोजन गैस भरने से चिप्स टूटते नहीं हैं क्योंकि नाइट्रोजन एक्स्ट्रा स्पेस को फिल कर पैकेट को टाइट रखती है।
- नाइट्रोजन गैस से चिप्स पैकेट को ट्रांसपोर्टेशन में आसानी होती है।
- नाइट्रोजन स्नैक्स को लंबे समय तक क्रिस्पी बनाए रखती है।
- अगर चिप्स में नाइट्रोजन गैस नहीं भरी जाए तो चिप्स गीला, नरम और खराब मिलेंगे।
- नाइट्रोजन की तुलना में ऑक्सीजन गैस काफी रिएक्टिव होती है। जिससे पैकेट में बैक्टीरिया वगैरह के पैदा होने का खतरा होता है जबकि नाइट्रोजन में ये खतरा खत्म हो जाता है।
- मार्केट के हिसाब से देखें तो गैस भरने से चिप्स का पैकेट काफी बड़ा दिखता है। जिससे कस्टमर के दिमाग में ज्यादा चिप्स होने की उम्मीद बनी रहती है।
- वायुमण्डल में करीब 78 प्रतिशत गैस नाइट्रोजन होती है। बिजली के बल्बों में भी नाइट्रोजन गैस भरी जाती है जिससे उसकी लाइफ बढ़ जाती है।
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