चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार ने यमुना नदी और उससे जुड़े जल स्रोतों की स्थिति सुधारने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में यहां हुई यमुना कार्य योजना की समीक्षा बैठक में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, औद्योगिक अपशिष्ट जल के लिए साझा उपचार संयंत्र, ठोस कचरा प्रबंधन, यमुना किनारे बसे गांवों में सीवेज प्रबंधन, जल निकायों के पुनरुद्धार और नए बायोगैस संयंत्र स्थापित करने सहित विभिन्न कार्यों की समीक्षा की गई। इन योजनाओं में सोनीपत, पानीपत, करनाल, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और यमुनानगर सहित विभिन्न शहरी क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मुख्य सचिव ने प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी परियोजनाओं को योजना और निविदा प्रक्रिया से आगे बढ़ाकर निर्धारित समय में पूरा करने और लंबित कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यमुना और उससे जुड़े जल स्रोतों की स्वच्छता के लिए सीवेज उपचार, औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन, ठोस कचरा प्रबंधन और जल स्रोतों के पुनरुद्धार पर एक साथ प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष श्री विनय प्रताप सिंह ने बताया कि गुरुग्राम में चार प्रमुख सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट विभिन्न चरणों में हैं। इनमें धनवापुर में 100 एमएलडी, बहरामपुर में 100 एमएलडी, नौरंगपुर में 40 एमएलडी और सेक्टर-107 में 100 एमएलडी क्षमता के संयंत्र शामिल हैं। इन परियोजनाओं की वित्तीय और तकनीकी निविदाएं अगस्त और सितंबर में खोली जानी प्रस्तावित हैं।
फरीदाबाद में 20 एमएलडी क्षमता के मिर्जापुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य 30 अगस्त तक शुरू करने का लक्ष्य है, जबकि 20 एमएलडी क्षमता वाली सूरजकुंड परियोजना की तकनीकी निविदाएं 24 अगस्त तक खोली जानी प्रस्तावित हैं।
सोनीपत में 7.5 एमएलडी क्षमता वाले कुंडली सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कार्य भी जल्द शुरू करने का लक्ष्य है। पानीपत के समालखा में प्रस्तावित 4 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की वित्तीय निविदाएं 25 अगस्त तक खोली जानी प्रस्तावित हैं।
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