चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने बच्चों से जबरन भीख मंगवाने वालों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। जीवनजोत प्रोजेक्ट-2 के तहत दो दिन में राज्य के 18 इलाकों में छापेमारी की गई और 41 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। इस कार्रवाई में कई मामले संदिग्ध पाए गए, खासकर बठिंडा में, जहां बच्चों की असली पहचान पर सवाल उठे हैं। सरकार ने ऐसे मामलों में डीएनए टेस्ट कराने का निर्णय लिया है। जांच पूरी होने तक बच्चे बाल सुधार गृह में रखे जाएंगे।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!राज्य की सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई माता-पिता अपने बच्चों से जबरन भीख मंगवाते हैं, तो उन्हें पहले समझाया जाएगा। इसके बाद भी न मानने पर उन्हें ‘अनफिट गार्जियन’ घोषित किया जाएगा और बच्चों को गोद देने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
डॉ. कौर ने यह भी कहा कि यदि इस तरह के अपराध में कोई गिरोह या रैकेट शामिल पाया गया, तो उनके खिलाफ 5 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।
सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 9 महीनों में 367 बच्चों को भीख से रेस्क्यू किया गया। इनमें से 350 को परिवार से जोड़ा गया और 183 बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलाया गया। 13 छोटे बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्र भेजा गया।
30 बच्चों को ₹4000 की स्पॉन्सरशिप दी जा रही है और 16 बच्चों को ₹1500 मासिक पेंशन मिल रही है।
हालांकि, चिंता की बात यह है कि 57 बच्चे अब भी लापता हैं, जिनका अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। प्रशासन इन मामलों की गंभीरता से जांच कर रहा है।
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