Wednesday , 26 August 2026
हरियाणा: पुराने वाटर वर्क्स होंगे RCC आधारित, ट्यूबवेल की जगह नहरी पानी से होगी पेयजल आपूर्ति — सीएम नायब सिंह सैनी
हरियाणा: पुराने वाटर वर्क्स होंगे RCC आधारित, ट्यूबवेल की जगह नहरी पानी से होगी पेयजल आपूर्ति — सीएम नायब सिंह सैनी

पेयजल की शुद्धता के लिए सभी पुराने वाटर-वर्क्स को आरसीसी आधारित बनाया जाए: मुख्यमंत्री।

चंडीगढ़:

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हरियाणा सरकार ने प्रदेशवासियों को स्वच्छ एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के उन सभी पुराने ईंट-निर्मित वाटर वर्क्स को RCC (रिइनफर्स्ड सीमेंट कंक्रीट) आधारित बनाया जाए, जहां भूमिगत जल के रिसाव से पानी की शुद्धता प्रभावित हो रही है। इसके अलावा, जिन इलाकों में संभव हो, वहां ट्यूबवेल आधारित व्यवस्था के बजाय प्राथमिकता के आधार पर नहरी पानी से जलापूर्ति की जाएगी।

जलघरों और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा बैठक मंगलवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (Public Health Engineering Department) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक के दौरान विभाग के प्रधान सचिव पंकज यादव ने राज्य में चल रही पेयजल परियोजनाओं का पूरा ब्यौरा पेश किया:

  • वर्तमान जल आपूर्ति इंफ्रास्ट्रक्चर: प्रदेश में फिलहाल 1,888 नहरी पानी आधारित वाटर वर्क्स, 4,199 बूस्टिंग स्टेशन, 12,404 ट्यूबवेल और 5 रेनी वेल (Rainy Well) स्कीम्स संचालित हैं।

  • पंचायतों को हस्तांतरण: विभाग द्वारा 3,674 ट्यूबवेलों का रखरखाव संबंधित ग्राम पंचायतों को सौंपा जा चुका है।

  • भविष्य की योजनाएं: राज्य में जरूरत के अनुसार 103 नए नहरी आधारित वाटर वर्क्स, 1,065 नए ट्यूबवेल, 369 नए बूस्टिंग स्टेशन और 2 नए रेनी वेल लगाने का काम तेजी से चल रहा है।

1,000 करोड़ रुपये की लागत से RCC में बदलेंगे 466 वाटर वर्क्स प्रधान सचिव ने बताया कि ईंटों से बने 466 पुराने वाटर वर्क्स को बदल कर RCC आधारित बनाया जा रहा है। इस परियोजना पर लगभग 1,000 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया जाएगा।

इसके साथ ही, राज्य के 7,005 किलोमीटर लंबे वितरण नेटवर्क (Distribution Network) में से 1,525 किलोमीटर पुरानी पाइपलाइनों को बदला जाना है, जिसमें से 837 किलोमीटर लंबी लाइनों को मार्च 2027 तक बदलने का लक्ष्य रखा गया है।

TDS और हार्डनेस की समस्या से मिलेगी मुक्ति मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि शुद्ध पेयजल मुहैया कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए बजटीय आवंटन में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पुराने वाटर वर्क्स में भूमिगत पानी मिक्स होने के कारण पानी में TDS, हार्डनेस और फ्लोराइड का स्तर बढ़ जाता है। इस पानी को साफ करने के लिए मशीनरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। RCC निर्माण से रिसाव की समस्या खत्म होगी और लोगों को सीधा शुद्ध पानी मिल सकेगा।

भूजल स्तर में सुधार और यमुना जल की गुणवत्ता मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उम्मीद जताई कि सरकार के इन प्रयासों से आगामी वर्षों में राज्य के गिरते भूजल स्तर (Groundwater Level) में सुधार होगा। उन्होंने यह भी बताया कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों की स्थापना से हरियाणा से दिल्ली की ओर बहने वाले यमुना जल की शुद्धता और गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य की बढ़ती आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही नए वाटर वर्क्स का निर्माण और उनकी क्षमता का विस्तार किया जाए।

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