चंडीगढ़, 18 सितंबर। हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि खेती की बढ़ती लागत और सीमित कृषि भूमि को देखते हुए किसानों को रासायनिक उर्वरकों और महंगे कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कृषि मंत्री शुक्रवार को यमुनानगर के जगाधरी में आयोजित जिला स्तरीय सहकारिता संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम हरियाणा राज्य सहकारी विकास संघ की ओर से ‘सहकारिता जागरूकता अभियान’ के तहत आयोजित किया गया।
सहकारिता से किसानों को मिलेगा आर्थिक मजबूती का आधार
श्याम सिंह राणा ने कहा कि देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में सहकारिता की अहम भूमिका है। उनके अनुसार सहकारिता के माध्यम से आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा सकता है, जिसका सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक प्रगति के साथ नागरिकों को सशक्त बनाने में सहकारी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर लोगों की भागीदारी जरूरी है।
प्राकृतिक खेती को बताया समय की जरूरत
कृषि मंत्री ने कहा कि खेती में लगातार बढ़ते खर्च के बीच प्राकृतिक खेती किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर होने वाला खर्च कम करके किसान खेती की लागत को नियंत्रित कर सकते हैं।
उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और कृषि की नई पद्धतियों को अपनाने की अपील की।
कृषि उपकरणों पर सब्सिडी और ऋण सुविधाएं
मंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है। किसानों को सब्सिडी पर कृषि उपकरण उपलब्ध कराने के साथ कृषि ऋण से जुड़ी सुविधाएं भी दी जा रही हैं।
प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए भी विभिन्न योजनाएं लागू की जा रही हैं, ताकि किसान कम लागत वाली खेती की ओर आगे बढ़ सकें और अपनी आय को मजबूत कर सकें।
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री कंवर पाल गुर्जर, अधिकारी, किसान, ग्रामीण और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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