चंडीगढ़, 10 सितंबर। हरियाणा में जल और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकार ने विभिन्न स्तरों पर चल रहे कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के उपचार से लेकर गांवों में अपशिष्ट जल प्रबंधन, बायोगैस, पराली प्रबंधन, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने और हरित क्षेत्र बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने आज यमुना एक्शन प्लान तथा दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सुधार से जुड़ी कार्ययोजनाओं की समीक्षा की। बैठक के दौरान उन्होंने संबंधित विभागों को निर्धारित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए।
यमुना एक्शन प्लान की जिलेवार समीक्षा
यमुना एक्शन प्लान की समीक्षा के दौरान यमुना बेसिन में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP), गांव स्तर पर अपशिष्ट जल प्रबंधन और बायोगैस परियोजनाओं की जिलेवार प्रगति पर चर्चा की गई।
बैठक में अंबाला, फरीदाबाद, रोहतक, गुरुग्राम और करनाल के मंडलायुक्तों ने अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।
छह नए STP का निर्माण जारी
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव योगेश कुमार ने बताया कि प्रदेश में कई महत्वपूर्ण सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
उन्होंने बताया कि बजघेड़ा, खेड़वा (सोनीपत), रादौर रोड (यमुनानगर), ददलाना (पानीपत), बादशाहपुर (फरीदाबाद) और सोढापुर (पानीपत) में कुल 132 MLD क्षमता के छह STP निर्माणाधीन हैं।
इन सभी छह परियोजनाओं को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद सीवेज के वैज्ञानिक उपचार और जल प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण मदद मिलने की उम्मीद है।
छह STP के अपग्रेडेशन पर भी काम
नए STP के निर्माण के साथ-साथ मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता और व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी काम किया जा रहा है।
गोहाना, सुनारिया (रोहतक), लाइन पार (बहादुरगढ़), हसनपुर (पलवल), धनवापुर और बहरामपुर (गुरुग्राम) में कुल 304 MLD क्षमता के छह STP के उन्नयन का कार्य चल रहा है।
इन परियोजनाओं के जरिए मौजूदा सीवेज उपचार व्यवस्था को बेहतर बनाने और बढ़ती जरूरत के अनुसार उसकी क्षमता को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
कई अन्य परियोजनाएं भी अलग-अलग चरणों में
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में कई अन्य STP परियोजनाएं भी आगे बढ़ रही हैं। कुछ परियोजनाएं निविदा प्रक्रिया, कुछ तकनीकी मूल्यांकन और कुछ क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।
सरकार का फोकस यमुना बेसिन में सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के उचित उपचार के साथ-साथ गांवों में अपशिष्ट जल प्रबंधन को मजबूत करने पर है।
वायु प्रदूषण पर भी विशेष फोकस
जल प्रदूषण के साथ-साथ दिल्ली और एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए भी विभिन्न विभागों को जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें पराली प्रबंधन, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करना, बायोगैस को बढ़ावा देना और हरित क्षेत्र का विस्तार जैसे कदम शामिल हैं।
मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को निर्धारित कार्यों में तेजी लाने और योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए, ताकि हरियाणा में जल एवं वायु प्रदूषण को कम करने की दिशा में ठोस परिणाम हासिल किए जा सकें।
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