नाभा: पंजाब की पुरानी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक त्योहारों को फिर से जीवंत करने की पहल के तहत नाभा ब्लॉक की सराय दास कॉलोनी, चौधरी माजरा पुली में तीज का त्योहार बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में गांव की महिलाओं और बेटियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान पारंपरिक रंग देखने को मिला और पूरे माहौल में तीज की खुशियां नजर आईं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कार्यक्रम का उद्घाटन आम आदमी पार्टी नाभा इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन जस्सी सोहिया वाला ने किया। उन्होंने कहा कि समय के साथ कई पारंपरिक त्योहारों की रौनक कम होती जा रही थी, लेकिन अब इन्हें दोबारा मनाने की पहल की जा रही है। उनके मुताबिक तीज जैसे त्योहार पंजाब की समृद्ध संस्कृति और पुरानी परंपराओं से नई पीढ़ी को जोड़ने का काम करते हैं।
सावन में बेटियों के मायके लौटने की परंपरा
पंजाबी संस्कृति में तीज का त्योहार विशेष महत्व रखता है। सावन के महीने में मनाया जाने वाला यह पर्व खास तौर पर बेटियों और नवविवाहित महिलाओं से जुड़ा माना जाता है। इस अवसर पर शादीशुदा बेटियां अपने मायके लौटती हैं और बचपन की सहेलियों व परिवार के साथ त्योहार की खुशियां साझा करती हैं।
तीज के दौरान झूले, पारंपरिक गीत, लोक संस्कृति और महिलाओं की सामूहिक भागीदारी इस त्योहार को खास बनाती है। मायके लौटकर बेटियों को मिलने वाली खुशी और अपनापन ही इस पर्व की सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है।
जस्सी सोहिया वाला ने कहा- त्योहार हमारी संस्कृति की पहचान
कार्यक्रम के दौरान जस्सी सोहिया वाला ने कहा कि पुराने समय में मनाए जाने वाले कई त्योहार धीरे-धीरे लोगों की दिनचर्या से दूर होते जा रहे थे। अब इन पारंपरिक पर्वों को दोबारा मनाने से पंजाब की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि गांवों में तीज जैसे त्योहारों का आयोजन लोगों को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ता है। उनके अनुसार पंजाब को फिर से उसकी पारंपरिक रंगत और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पिछले दो साल से मनाया जा रहा तीज का त्योहार
सराय दास कॉलोनी, चौधरी माजरा पुली के सरपंच ओम प्रकाश ओमी ने बताया कि गांव में पिछले दो वर्षों से तीज का त्योहार आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से गांव की बेटियों और महिलाओं को अपनी पुरानी परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि पंजाब की संस्कृति को जीवंत रखने के लिए गांव स्तर पर पारंपरिक त्योहारों का आयोजन बेहद जरूरी है। तीज जैसे पर्व सामाजिक मेल-जोल बढ़ाने के साथ-साथ पुरानी लोक परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी हैं।
बेटियों के मायके लौटने से लौटी त्योहार की पुरानी रौनक
कार्यक्रम में शामिल गांव की महिलाओं और बेटियों ने भी तीज के आयोजन पर खुशी जाहिर की। महिलाओं ने कहा कि शादी के बाद ससुराल चली जाने वाली बेटियों का सावन में मायके लौटना इस त्योहार की सबसे खूबसूरत परंपराओं में से एक है।
उन्होंने कहा कि गांव में तीज का आयोजन होने से पुरानी यादें और परंपराएं फिर से जीवंत हो रही हैं। शादीशुदा बेटियां मायके लौटकर अपनी सहेलियों और परिवार के साथ तीज मनाती हैं, जिससे गांव में उत्सव का माहौल बन जाता है।
स्थानीय महिलाओं के मुताबिक ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को भी पंजाब की लोक संस्कृति, रीति-रिवाज और पारंपरिक त्योहारों के बारे में जानने का अवसर मिलता है।
नाभा में आयोजित तीज समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आधुनिक दौर में भी पंजाब की पारंपरिक संस्कृति और लोक त्योहारों को सहेजकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता है।
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