अंबाला, 31 जुलाई: हरियाणा की सियासत में उस वक्त हलचल मच गई जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा हारी हुई 42 विधानसभा सीटों पर नियुक्त किए गए प्रभारियों की सूची में पार्टी के वरिष्ठ नेता और सात बार के विधायक अनिल विज का नाम शामिल नहीं था। इस पर अब खुद विज ने सामने आकर सफाई दी है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!अनिल विज का बयान
अनिल विज ने कहा,
“मैं पार्टी का सबसे वरिष्ठ विधायक हूं। मुझे विधानसभा की नहीं, पूरे हरियाणा की जिम्मेदारी दी गई है। विधानसभा प्रभारियों को केवल एक सीट दी गई है, जबकि मैं पूरे प्रदेश में दौरा करूंगा।”
विज ने कहा कि वह जल्द ही प्रदेशव्यापी दौरा शुरू करने वाले हैं, जिसमें वे पार्टी के नए और पुराने कार्यकर्ताओं से मिलेंगे। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को भी चेताया कि वे प्रदेश के उन अधिकारियों की स्थिति भी जानेंगे, जो सरकार की योजनाओं को ठीक से लागू नहीं कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
हरियाणा भाजपा ने हाल ही में पिछली विधानसभा चुनाव में हारी हुई 42 सीटों पर संगठनात्मक मजबूती के लिए मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को प्रभारी नियुक्त किया है। ये फैसला मुख्यमंत्री आवास पर हुई विधायक दल की बैठक में लिया गया था।
प्रभारियों की सूची में विपुल गोयल, राव नरबीर सिंह, रणबीर गंगवा, महिपाल ढांडा, गौरव गौतम, श्रुति चौधरी, आरती सिंह राव, कृष्ण कुमार बेदी जैसे नेताओं को अहम जिम्मेदारियाँ दी गई हैं। मगर सूची में अनिल विज का नाम न होना राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का विषय बन गया।
विज की नाराजगी या रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अनिल विज का यह बयान केवल सफाई नहीं बल्कि एक स्पष्ट संदेश भी है – कि वे खुद को सीमित सीटों तक सीमित नहीं मानते। वे हरियाणा भाजपा में बड़ी भूमिका निभाने की इच्छा रखते हैं।
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