चमोली, 22 जून 2025 — उत्तराखंड के चमोली जिले में मौसम की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए पुलिस ने श्रद्धालुओं से अलकनंदा नदी के पास जाने से बचने की सख्त अपील की है। रविवार को चमोली पुलिस ने X (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि अचानक हुई भारी बारिश के कारण अलकनंदा नदी का जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!पोस्ट में लिखा गया है:
“महत्वपूर्ण सूचना। वर्तमान में मौसम अस्थिर है। अचानक हुई बारिश के कारण श्री बद्रीनाथ धाम में अलकनंदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे नदी के पास न जाएं। कृपया सावधान रहें। आपकी सुरक्षा, हमारी प्राथमिकता है।”
पहले भी आईं थी बड़ी चुनौतियां
15 जून को उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के गौरीकुंड के वन क्षेत्र में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में पायलट समेत सात लोगों की मौत हो गई थी। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) ने बताया कि यह हेलीकॉप्टर केदारनाथ धाम से गुप्तकाशी की उड़ान भर रहा था, तभी दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
दुर्घटना में मारे गए लोग:
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जयपुर निवासी कैप्टन राजबीर सिंह चौहान (39)
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बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के प्रतिनिधि विक्रम रावत (47)
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उत्तर प्रदेश निवासी विनोद देवी (66)
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उत्तर प्रदेश निवासी त्रिशती सिंह (19)
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गुजरात निवासी राजकुमार सुरेश जायसवाल (41)
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महाराष्ट्र निवासी श्रद्धा राजकुमार जायसवाल
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श्रद्धा की दो वर्षीय बेटी काशी
एसडीआरएफ कमांडर अर्पण यादव के निर्देशन में बचाव दल ने कठिन और घने जंगलों में जाकर शवों को सड़क तक पहुंचाया।
बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के प्रवक्ता हरीश गौड़ ने बताया कि मंदिर समिति के कर्मचारियों ने मृतक विक्रम रावत के निधन पर शोक व्यक्त किया है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दुर्घटना के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वर्चुअल उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में राज्य के मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन सचिव, यूसीएडीए के सीईओ, गढ़वाल आयुक्त और अन्य अधिकारी शामिल थे।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने बताया कि दुर्घटना की जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) करेगा। साथ ही चार धाम यात्रा में हेलीकॉप्टर उड़ानों की संख्या को कम करने का निर्णय लिया गया है। डीजीसीए ने निगरानी और परिचालन की समीक्षा भी बढ़ा दी है।
यात्रियों से अपील
चमोली पुलिस और प्रशासन ने साफ कहा है कि अचानक मौसम में हो रहे बदलाव और नदी का बढ़ता जलस्तर अत्यंत खतरनाक हैं। सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे नदी के किनारे न जाएं और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
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