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महाराष्ट्र के हिंदी विवाद पर ‘गब्बर’ अनिल विज का कटाक्ष: “क्या अब मंदिर-मस्जिद भी बंद करवाएंगे?”

चंडीगढ़, 5 जुलाई 2025 — महाराष्ट्र में हिंदी भाषा को लेकर छिड़े विवाद ने अब राष्ट्रीय सियासत को गर्मा दिया है। इसी मुद्दे पर हरियाणा के वरिष्ठ भाजपा नेता और मंत्री अनिल विज ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने बिना नाम लिए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे को आड़े हाथों लेते हुए सवाल उठाया है कि अगर हिंदी थोपने का विरोध किया जा रहा है तो क्या अब संस्कृत में लिखी गीता और अरबी में लिखी कुरान को भी नकारा जाएगा?

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विज ने कहा, “अगर कोई कहे कि हिंदी किसी पर थोपी जा रही है, तो क्या हम ये भी कहें कि गीता संस्कृत में है इसलिए इसे ना पढ़ें? या कुरान अरबी में है इसलिए उसे भी नकार दें? अगर ऐसे तर्क दिए जाएंगे तो कल को ये लोग मंदिर-मस्जिद भी बंद करवाने की मांग कर सकते हैं।”

ठाकरे बंधुओं की एकजुटता बनी विवाद की वजह

इस विवाद की चिंगारी तब भड़की जब शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे लगभग दो दशकों बाद एक मंच पर आए। इस मौके पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि “आप किसी पर हिंदी नहीं थोप सकते।” इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।

“हिंदी जोड़ने का सूत्र है”: अनिल विज

विज ने आगे कहा, “हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा है, जो देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने का कार्य करती है। ये हमारे संघीय ढांचे को मजबूत बनाए रखने का सबसे बड़ा आधार है। इसे थोपने की बात करना देश की एकता पर चोट करना है।”

मणिपुर मुद्दे पर भी कांग्रेस पर हमला

वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं पर उठाए सवालों पर भी अनिल विज ने पलटवार किया। खड़गे ने कहा था कि पीएम ने 42 देशों की यात्रा की लेकिन मणिपुर नहीं गए। इस पर विज ने कहा, “प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत के विदेश संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत हुए हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा हुआ है। और जहां तक मणिपुर की बात है, गृहमंत्री अमित शाह खुद वहां गए, बैठकें कीं और स्थिति को नियंत्रित किया – वो भी मोदी जी के निर्देशानुसार।”

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