डीगढ़, 14 सितंबर। हरियाणा पुलिस ने संगठित अपराध और सक्रिय अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए अपनी निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया है। पुलिस ने प्रदेशभर में सक्रिय अपराधियों की पहचान और उनकी मौजूदा स्थिति की निगरानी के लिए इंटेलिजेंस आधारित RJSF पैटर्न को व्यापक स्तर पर लागू करना शुरू किया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!1 फरवरी से 25 अगस्त 2026 के बीच पुलिस ने 45,207 सक्रिय अपराधियों का डेटाबेस तैयार किया। इनमें से 26,026 अपराधियों का सत्यापन पूरा किया जा चुका है। यानी कुल सूची में शामिल करीब 57.57 प्रतिशत अपराधियों की जांच पूरी हो चुकी है।
अपराधियों की मौजूदा स्थिति पर पुलिस की सीधी नजर
इस अभियान के तहत पुलिस केवल पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पता लगाने पर भी जोर दिया जा रहा है कि संबंधित अपराधी फिलहाल कहां है और उसकी गतिविधियां क्या हैं।
सत्यापन के दौरान 7,425 अपराधी अपने दर्ज पते पर मिले, जबकि 1,612 अपराधी जेल में पाए गए। जांच में 375 अपराधियों की मौत होने की पुष्टि भी हुई है।
बाकी 19,137 अपराधियों का सत्यापन अभी किया जाना है। पुलिस के मुताबिक इस प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि डेटाबेस में दर्ज प्रत्येक अपराधी की वर्तमान स्थिति अपडेट की जा सके।
डीजीपी का निर्देश- डेटा बने अपराध नियंत्रण का आधार
पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मौजूदा दौर में अपराध नियंत्रण के लिए पारंपरिक पुलिसिंग के साथ तकनीक, इंटेलिजेंस और डेटा का प्रभावी इस्तेमाल किया जाए।
पुलिस का फोकस अपराधी की पहचान और रिकॉर्ड तैयार करने के साथ-साथ उसकी गतिविधियों तथा आपराधिक संपर्कों की जानकारी को लगातार अपडेट करने पर है। किसी अपराधी की गतिविधि संदिग्ध या सक्रिय पाए जाने की स्थिति में स्थानीय स्तर पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
FRS डेटा से तकनीकी निगरानी को मिलेगा बल
RJSF पैटर्न के तहत अपराधियों से जुड़ी डिजिटल जानकारी को भी व्यवस्थित किया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब तक 6,762 अपराधियों का FRS डेटा अपलोड किया जा चुका है।
इससे पुलिस को अपराधियों की पहचान और उनकी गतिविधियों की तकनीकी निगरानी में मदद मिलने की उम्मीद है। फील्ड पुलिसिंग, डिजिटल रिकॉर्ड और इंटेलिजेंस इनपुट को एक साथ जोड़कर संभावित आपराधिक गतिविधियों पर समय रहते नजर रखने की कोशिश की जा रही है।
चार जिलों से शुरू हुआ मॉडल अब पूरे प्रदेश में
RJSF पैटर्न की शुरुआत अपराध की दृष्टि से संवेदनशील माने जाने वाले रोहतक, झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद जिलों में की गई थी। यहां अपराधियों की प्रोफाइलिंग, मौजूदा स्थिति का सत्यापन, आपराधिक नेटवर्क की पहचान और फील्ड स्तर की निगरानी को एक ही प्रक्रिया से जोड़ने का प्रयास किया गया।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कानून एवं व्यवस्था संजय कुमार के अनुसार, इन जिलों में मॉडल से मिले अनुभव के बाद इसे प्रदेश के अन्य हिस्सों तक विस्तार दिया जा रहा है।
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