चंडीगढ़: किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी की अगुवाई में किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज मुख्यमंत्री से मुलाकात कर हाल ही में जारी किए गए सरकारी नोटिफिकेशन को वापस लेने की मांग की। यह नोटिफिकेशन निजी स्थानों को मंडी का दर्जा देने से संबंधित है, जिसे लेकर किसानों में आक्रोश है।
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नोटिफिकेशन का विरोध
गुरनाम सिंह चढूनी ने नोटिफिकेशन पर आपत्ति जताते हुए इसे मंडी व्यवस्था और किसानों के लिए नुकसानदायक बताया। उनका कहना है कि:
आढ़त का अंत होगा: निजी स्थानों को मंडी घोषित करने से पारंपरिक आढ़त प्रथा समाप्त हो जाएगी।
फसलों की खरीद प्रभावित होगी: गेहूं और अन्य फसलें मंडियों में न जाने से प्रतिस्पर्धा खत्म हो जाएगी, जिससे किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल सकेगा।
बेरोजगारी बढ़ेगी: मंडियों से जुड़े मुनीम, बारदाना आपूर्तिकर्ता और ट्रांसपोर्ट व्यवसायी बेरोजगार हो जाएंगे।
सरकार पर विश्वासघात का आरोप
चढूनी ने इस कदम को पुराने कृषि कानूनों की वापसी जैसा बताया। उन्होंने कहा,
“जिन कानूनों के खिलाफ हमने लंबा संघर्ष किया, उन्हें फिर से लागू करना किसानों के साथ विश्वासघात है।”
पंजाब बंद का समर्थन
चढूनी ने पंजाब बंद के आह्वान का समर्थन करते हुए इसे सरकार को चेतावनी देने का तरीका बताया। उन्होंने कहा,
“बंद न केवल जनता को जागरूक करता है, बल्कि यह सरकार को भी संकेत देता है। हम पंजाब बंद का पूरी तरह समर्थन करते हैं।”
सरकार को चेतावनी
किसान नेताओं ने साफ कर दिया कि अगर उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे। उन्होंने हरियाणा सरकार से अपील की कि वह केंद्र सरकार से बात कर इन मुद्दों का समाधान निकाले।
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