हिसार: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में आयोजित दो दिवसीय कृषि मेला (रबी) का मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन किया और किसानों के लिए प्रदर्शित उन्नत बीज, कृषि यंत्र, आधुनिक तकनीक और अन्य कृषि उत्पादों की जानकारी ली।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलती जलवायु और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच ऐसी खेती को बढ़ावा देना जरूरी है, जिसमें कम पानी और कम संसाधनों में अधिक उत्पादन हासिल किया जा सके। उन्होंने सतत कपास उत्पादन, फसल विविधीकरण और जल संरक्षण को भविष्य की खेती के लिए महत्वपूर्ण बताया।
कपास की खेती में आधुनिक तकनीक पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि कपास हरियाणा की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है और सिरसा, फतेहाबाद, हिसार समेत आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान इससे जुड़े हैं। बदलते मौसम और कीटों की चुनौतियों को देखते हुए नई किस्मों और वैज्ञानिक तकनीकों पर तेजी से काम करने की जरूरत है।
कृषि मेले में प्रदर्शित कपास चुगाई मशीन का भी मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया। उनके अनुसार, यह मशीन एक घंटे में करीब एक एकड़ कपास की चुगाई कर सकती है और हाथ से चुगाई की तुलना में समय कम लगता है। सरकार कपास चुगाई और गन्ना छिलाई जैसी मशीनों को बढ़ावा दे रही है, ताकि श्रमिकों की कमी का असर फसलों के क्षेत्र पर न पड़े।
257 कपास किसान खेत पाठशालाओं का आयोजन
मुख्यमंत्री ने बताया कि कपास किसानों को खेत स्तर पर जागरूक करने के लिए 257 कपास किसान खेत पाठशालाएं आयोजित की गईं। इनमें 7 हजार से अधिक किसानों को कपास की बिजाई से लेकर चुगाई तक हानिकारक कीटों की पहचान और उनके बेहतर प्रबंधन की जानकारी दी गई।
इसके अलावा 167 किसान मेलों में कम लागत में कपास उत्पादन और अधिक मुनाफे से जुड़े उपायों के बारे में किसानों को जानकारी दी गई।
फसल विविधीकरण और जल संरक्षण पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगातार गेहूं और धान की खेती से पानी की खपत बढ़ती है। ऐसे में दलहन, तिलहन और कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को बढ़ावा देना जरूरी है।
उन्होंने ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि वैकल्पिक फसल लेने या खेत खाली छोड़ने वाले किसानों को 8 हजार रुपये प्रति एकड़ वित्तीय सहायता दी जाती है। अब तक 2.34 लाख एकड़ में धान की जगह वैकल्पिक फसल लेने पर 1.59 लाख किसानों को 166 करोड़ 34 लाख रुपये की सहायता दी जा चुकी है।
वहीं, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो इरिगेशन तकनीकों पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी और तालाब निर्माण के लिए भी 85 प्रतिशत तक अनुदान दिए जाने की जानकारी दी गई।
मिट्टी की जांच के लिए 1.06 करोड़ से ज्यादा सॉयल हेल्थ कार्ड
कृषि में मिट्टी की सेहत को महत्वपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच के बाद 1 करोड़ 6 लाख सॉयल हेल्थ कार्ड जारी किए गए हैं। प्रदेश में मिट्टी और पानी की जांच के लिए 17 नई प्रयोगशालाएं भी स्थापित की गई हैं।
इसके अलावा मंडियों में 54 और स्कूल-कॉलेजों में 240 लघु मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित किए जाने की जानकारी दी गई। किसानों के लिए ‘हर खेत-स्वस्थ खेत’ पोर्टल भी शुरू किया गया है।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए पोर्टल शुरू किया गया है। करीब 2 लाख किसानों ने 3 लाख एकड़ क्षेत्र का पंजीकरण कराया है। इनमें से 23,930 किसानों का 44 हजार एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए सत्यापन किया जा चुका है।
प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण के लिए कुरुक्षेत्र-गुरुकुल, जींद-हमेटी, सिरसा-मंगियाना और करनाल-घरौंडा में प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए हैं। अब तक 12,188 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
सरकार ने प्राकृतिक तरीके से तैयार फसलों की खरीद हैफेड के माध्यम से करने की बात भी कही है।
किसानों को सोलर पंप और फसल अवशेष प्रबंधन पर सब्सिडी
मुख्यमंत्री के अनुसार, PM-KUSUM योजना के तहत किसानों को सोलर पंप लगाने के लिए 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। अब तक 1,95,653 सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं।
फसल अवशेष प्रबंधन के लिए व्यक्तिगत किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी पर 1,11,000 से अधिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। कस्टम हायरिंग सेंटरों को 80 प्रतिशत सब्सिडी देकर 6,794 सेंटर स्थापित किए गए हैं।
पराली के उचित प्रबंधन और गांठ बनाने के लिए 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान बताया गया है।
कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने किसानों से आधुनिक तकनीक अपनाने की अपील
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की धुरी है। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से फसल विविधीकरण के लिए किसानों को तकनीक और सुविधाएं उपलब्ध कराने का आह्वान किया। साथ ही किसानों से मिट्टी, हवा और पानी को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने की अपील की।
HAU ने कपास की नई किस्मों और तकनीक पर दी जानकारी
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज ने बताया कि कपास उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विश्वविद्यालय काम कर रहा है।
उन्होंने HAU BT-12 और HAU BT-13 कपास किस्मों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें बेहतर उत्पादन क्षमता है। उन्होंने रेतीली भूमि में ड्रिप सिंचाई के साथ फर्टिगेशन अपनाने और कपास के साथ मूंग की अंत:फसली खेती से अतिरिक्त आय की संभावना भी बताई।
विश्वविद्यालय सरसों, मूंग, बाजरा और अन्य फसलों की उन्नत किस्मों पर भी काम कर रहा है। विश्वविद्यालय हर वर्ष करीब 25 हजार क्विंटल प्रमाणित बीज तैयार कर किसानों तक पहुंचाता है।
45 प्रगतिशील किसान सम्मानित
कृषि मेले में मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर से आए 45 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। इनमें प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, फसल अवशेष प्रबंधन, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी फार्मिंग, मधुमक्खी पालन और केंचुआ खाद जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले 30 पुरुष और 15 महिला किसान शामिल रहे।
9.94 करोड़ की लागत से जैविक खेती उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय परिसर में दीनदयाल उपाध्याय जैविक खेती उत्कृष्टता केंद्र का भी उद्घाटन किया। करीब 9.94 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस केंद्र का उद्देश्य किसानों को जैविक खेती की आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और प्रशिक्षण से जोड़ना है।
केंद्र के जरिए रसायन-मुक्त खेती, मिट्टी की उर्वरता और उच्च गुणवत्ता वाली जैविक फसलों के उत्पादन से जुड़ी तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।
Pratham Tehelka Pratham Tehelka News
