हिसार।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!हरियाणा के हिसार जिले के भेरिया गांव के युवा मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। शानदार जीत के बाद जब अंकुश हिसार लौटा तो खेल प्रेमियों, ग्रामीणों और परिजनों ने उसका जोरदार स्वागत किया।
हिसार के चार नंबर गेट पर अंकुश का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया और मिठाइयां बांटकर अपनी खुशी जाहिर की। अंकुश को फूलों से सजी जीप में बैठाकर स्वागत जुलूस निकाला गया। इस दौरान समर्थकों ने भारत माता की जय और अंकुश पंघाल के समर्थन में नारे लगाए।
इंग्लैंड के मुक्केबाज को हराकर जीता गोल्ड
22 वर्षीय अंकुश पंघाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स के मुक्केबाजी मुकाबले में इंग्लैंड के डिमेजी शिट्टू को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। अंकुश ने महज 11 साल की उम्र में मुक्केबाजी की शुरुआत की थी। खेल के प्रति उसकी मेहनत और लगातार अभ्यास ने उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
अंकुश रोजाना करीब पांच घंटे मुक्केबाजी की प्रैक्टिस करता है। उसके परिवार के कई सदस्य भी खेलों से जुड़े हुए हैं। कोच प्रवीण सावंत के मार्गदर्शन में अंकुश ने अपनी तकनीक और प्रदर्शन में लगातार सुधार किया और कई प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किए।
काउंटर अटैक बना अंकुश की सबसे बड़ी ताकत
कोच प्रवीण सावंत के अनुसार अंकुश की सबसे बड़ी ताकत उसकी काउंटर अटैक तकनीक है। वह प्रतिद्वंद्वी को पहले हमला करने का मौका देता है और सही समय देखकर उसके पंच का जवाब तेज काउंटर अटैक से देता है। यही रणनीति मुकाबलों में उसके लिए काफी प्रभावी साबित हुई है।
अब ओलंपिक में गोल्ड जीतने का लक्ष्य
गोल्ड मेडल जीतने के बाद अंकुश ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच और परिवार को दिया। उसने कहा कि यह उपलब्धि उसकी वर्षों की मेहनत और अभ्यास का परिणाम है। अंकुश का अगला लक्ष्य ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना है।
अंकुश के हिसार पहुंचने पर शहर और आसपास के कई स्थानों पर उसका स्वागत किया गया। ग्रामीणों, परिजनों और खेल प्रेमियों ने मिठाइयां बांटकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया। भेरिया गांव में अंकुश की जीत को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।
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