नई दिल्ली, 28 मई 2025: केंद्र सरकार ने पेंशनभोगियों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अब सरकारी सेवा के बाद अगर कोई पूर्व सरकारी कर्मचारी किसी Public Sector Undertaking (PSU) में नियुक्त होता है और वहां अनुशासनहीनता या भ्रष्टाचार के चलते निकाला जाता है, तो उसे अब सरकारी सेवा के दौरान अर्जित की गई पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!यह नया नियम Central Civil Services (Pension) Rules, 2021 के Rule 37 में किए गए संशोधन के तहत लागू किया गया है। यह फैसला कार्मिक मंत्रालय के तहत आने वाले पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा लिया गया है।
क्या है नया नियम?
- अब PSU से अनुशासनात्मक कार्रवाई में निकाले गए कर्मचारियों को पेंशन नहीं मिलेगी, चाहे उन्होंने केंद्र सरकार में कितने भी साल सेवा की हो।
- पहले नियम: अगर कोई PSU से निकाला जाता था, तब भी केंद्र सरकार की सेवा के दौरान कमाई गई पेंशन मिलती रहती थी।
- अब नियम: PSU में दुराचार होने पर सरकारी सेवा की पेंशन पूरी तरह खत्म हो सकती है।
किन लोगों पर होगा असर?
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वे पूर्व सरकारी कर्मचारी जो अब किसी PSU में स्थायी रूप से काम कर रहे हैं।
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वे कर्मचारी जो रिटायरमेंट के बाद PSU में शामिल हुए हैं।
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वे कर्मचारी जो PSU से अनुशासनहीनता के आधार पर हटाए जाते हैं।
कैसे होगी समीक्षा?
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PSU से निकाले गए कर्मचारी के केस की समीक्षा उस PSU के प्रशासनिक मंत्रालय द्वारा की जाएगी।
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सरकारी सेवकों पर लागू अनुशासनात्मक नियम अब PSU कर्मचारियों पर भी अनुरूप रूप से (analogous) लागू होंगे।
क्या हो सकता है नुकसान?
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भले ही दुराचार या अनुशासनहीनता 10 साल बाद हुई हो, लेकिन अगर PSU से निकाले गए, तो पेंशन पूरी तरह रद्द हो सकती है।
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सरकारी सेवा में अर्जित की गई Gratuity और Pension पर भी असर पड़ेगा।
सरकार का उद्देश्य क्या है?
सरकार का कहना है कि यह कदम सार्वजनिक सेवा में पारदर्शिता, जिम्मेदारी और अनुशासन को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। अब हर सरकारी या PSU कर्मचारी के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि वे पूरे करियर में ईमानदारी और अनुशासन बनाए रखें।
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