चंडीगढ़, 18 मार्च- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के शून्यकाल के दौरान 2008 में पुलिस निरीक्षक भर्ती में हुए अन्याय का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय इस भर्ती प्रक्रिया में युवाओं के साथ भेदभाव हुआ था, जो न केवल चिंता का विषय है, बल्कि उच्च न्यायालय के निर्णय में भी इसकी गंभीरता को रेखांकित किया गया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!2008 की भर्ती प्रक्रिया पर उच्च न्यायालय की चिंता
मुख्यमंत्री सैनी ने सदन में कहा कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में उस समय की अपनाई गई भर्ती प्रक्रिया पर गहरी चिंता जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में टॉप पर रहने वाले उम्मीदवारों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया, जबकि अन्य उम्मीदवारों को भर्ती में प्राथमिकता दी गई। यह न केवल युवाओं के साथ अन्याय था, बल्कि यह प्रक्रिया भी पारदर्शिता से दूर थी।
विधानसभा चुनावों के दौरान युवाओं को बहकाने का आरोप
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस प्रकार के भेदभाव का असर विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिला। उन्होंने बताया कि चुनावों के दौरान युवाओं को बहकाने का प्रयास किया गया और उन्हें यह कहा गया कि “50 वोट दो और एक नौकरी पक्की करो”। यह युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा था, जो कि पूरी तरह से गलत था।
Pratham Tehelka Pratham Tehelka News
